शहर मे बंदरों व आवारा पशुओं के आतंक से नगर वासी परेशान
शहर मे बंदरों व आवारा पशुओं के आतंक से नगर वासी परेशान
मतदाताओं द्वारा बनाया जाएगा चुनावों में गंभीर मुद्दा
नूरपुर : विनय महाजन /
हिमाचल प्रदेश की नूरपुर नगर परिषद में गत कई दशकों से बंदरों व आवारा पशुओं की लगातार बढ रही संख्या तथा आंतक शहर वासियो में चर्चा का विषय बना हुआ हैlस्थानीय निवासियों का मानना है काफी समय से चली आ रही इन जटिल समस्यो का समाधान कोई भी नगर परिषद नहीं कर सकी l मतदाताओं द्वारा चुनावों में यह गंभीर मुद्दा बनाया जाएगा l इतना ही नही बीजेपी सरकार मे नूरपुर नगर परिषद में पहली बार भगवा झंडा सत्ता के बलबूते पर लहराया गया था l भाजपा सरकार में उन दिनों राकेश पठानिया वन मंत्री थे उसके बावजूद भी नगर परिषद मे नगर वासियों को राहत नहीं मिली l भाजपा की नगर परिषद फिलहाल 5 सालो मे इन पर अंकुश लगाने में कामयाब नहीं हो सकी l प्रदेश में व्यवस्था परिवर्तन करने वाली सरकार सत्ता में आई और सरकार के 4 साल पूरे होने को है लेकिन भाजपा की नगर परिषद इन समस्यो का समाधान भाजपा विधायक रणवीर सिंह निक्का के रहते हुए नगर वासियों के हित में नहीं कर सकी l गौरतलव है कि पिछले दिनों हाल ही में एक पूर्व पार्षद की पत्नी पर बंदरों ने अचानक धावा बोलकर उसको गंभीर रूप से घायल कर दिया जब उसकी पत्नी छत पर किसी कार्य को कर रही थीl एक पूर्व अधिकारी जितेंद्र धीमान ने बताया कि उसके घर पर रखी पानी की टंकी को बंदर कई बार तोड़कर नष्ट कर चुके हैंl उधर आवारा पशुओं के द्वारा भी शहर में कई लोगों को घायल किया गया जिसमें सीनियर सिटीजन भी शामिल है इस मामले में नगर परिषद की कारगुजारी अश्वासन देने तक सीमित है रही है l इतना नहीं वंदरो के इतने हौसले हैं कि वह घरो मे रसोई घर से फ्रिज खोलकर भी सामान बिना खौफ के ले जाते हैंl अधिकांश शहर वासियों का कहना है कि इस मास में होने वाले नगर परिषद चुनावों में वह उसी पक्ष में मतदान करेंगे जो शहर में व्याप्त बंदर आंतक से निजात प्रदान करेंगा l उधर इस मामले में कुछ सामाजिक संस्थाओं का कहना है कि नगर परिषद में खड़े होने वाले सभी प्रत्याशियों से इन समस्यो का समाधान करने के लिए वह अपनी बातें रखेंगे जब प्रत्याशी डोर टू डोर घरों पर वोट के लिए आएंगे और उसी प्रत्याशी को वोट दिया जाएगा जो इनसमस्याओं से समाधान करवाने में निजात दिलाएगा l क्षेत्र वासियों का यह कहना है कि यह चुनाव किसी सियासी पार्टी सिंबल पर नहीं हो रहे है जबकि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में यह चुनाव गैर राजनीतिक विधि के द्वारा होने हैं l
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