प्रभु भक्ति के बिना सांसारिक सुख अधूरे : स्वामी विकासानंद
प्रभु भक्ति के बिना सांसारिक सुख अधूरे : स्वामी विकासानंद नूरपुर : विनय महाजन / नूरपुर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा शिव मंदिर, बासा बाजीरा गनोह रोड, नूरपुर में आयोजित तीन दिवसीय श्री हरि कथा के तीसरे एवं अंतिम दिवस की सभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी विकासानंद जी ने कहा कि मनुष्य संसार में धन, संपत्ति, पद-प्रतिष्ठा और भौतिक सुख-सुविधाओं के माध्यम से आनंद प्राप्त करना चाहता है, लेकिन वास्तविक सुख की अनुभूति प्रभु भक्ति से ही संभव है।अपने विचारों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी की श्रीरामचरितमानस की चौपाई का उल्लेख किया—भगति हीन गुन सब सुख ऐसे। लवन बिना बहु बिंजन जैसेउन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने समझाया है कि भक्ति के बिना जीव के सभी गुण और सांसारिक सुख अधूरे हैं। जिस प्रकार नमक के बिना स्वादिष्ट व्यंजन भी फीके लगते हैं, उसी प्रकार प्रभु भक्ति के बिना जीवन के सुख भी नीरस रह जाते हैं। भौतिक साधन मनुष्य को सुविधाएँ तो प्रदान कर सकते हैं, लेकिन मन की वास्तविक शांति और आत्मि...