चंबा के चमीनू क्षेत्र को हीलिंग विलेज और एचटूओ को योगिनी स्टे के रूप में मिली वैश्विक पहचान

 चंबा के चमीनू क्षेत्र को हीलिंग विलेज और एचटूओ को योगिनी स्टे के रूप में मिली वैश्विक पहचान

भोपाल में आयोजित छठे अंतरराष्ट्रीय योगिनी सम्मेलन और अवार्ड्स 2026 में मिला सम्मान 


चंबा : जितेन्द्र खन्ना /

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित छठे अंतरराष्ट्रीय योगिनी सम्मेलन और अवार्ड्स 2026 में चमीनू क्षेत्र को हिमालयी क्षेत्र के पहले हीलिंग विलेज (आरोग्य ग्राम) और योगिनी होमस्टे के गौरवशाली सम्मान से नवाजा गया है। अब चमीनू क्षेत्र के करीब 10 गांवों में प्राकृतिक खेती व अन्य जरूरी पहलुओं पर कार्य किया जाएगा। चमीनू में उत्तर भारत की पहली श्रीश्री वेद आगम संस्कृत पाठशाला भी मौजूद है।यहां पर घराट संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन को लेकर भी कार्य किया जाएगा। इसमें आर्ट आफ लिविंग उन्नति मिशन, होलिस्टिक हिमालया, पहाड़ ट्रस्ट व अन्य सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा। इंडियन योगिनी एसोसिएशन व एक्ट संस्था के तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में चमीनू गांव को यह सम्मान नाट आन मैप एचटूओ हाउस की अभिनव पहल के लिए दिया गया। एचटूओ हाउस को रेनू शर्मा व चंबा के स्थानीय समुदाय को सुमन देवी और अनूप कुमार ने रिपरजेंट किया। इस संस्था ने समुदाय आधारित पर्यटन को एक नई दिशा देते हुए ग्रामीण भारत की सादगी को दुनिया के सामने लग्जरी आफ सिंप्लिसिटी के रूप में पेश किया है। भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित निनाद आडिटोरियम में जब चमीनू क्षेत्र का नाम गूंजा, तो पूरा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सम्मेलन का मुख्य विषय एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य था, जिसके तहत यह संदेश दिया गया कि मानवता का स्वास्थ्य प्रकृति के स्वास्थ्य से जुड़ा है। इंडियन योगिनी एसोसिएशन की नेशनल प्रेसिडेंट डा. आरएच लता के नेतृत्व में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर मस्कट, आस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और नेपाल जैसे देशों सहित भारत के विभिन्न राज्यों (मुंबई, हरियाणा, हिमाचल, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, पुणे, उज्जैन) की भागीदारी ने इस आयोजन को वैश्विक स्वरूप दिया है। सिक्किम के अंकुर शर्मा और चलामथांग योगिनी होमस्टे जैसे माडलों भी प्रस्तुत हुए।   


चमीनू की सफलता के पीछे का सामुदायिक योगदान 

चमीनू क्षेत्र की इस सफलता के पीछे यहां के निवासियों का अटूट श्रम और पारंपरिक ज्ञान है। स्थानीय लोगों ने अपनी पारंपरिक चिकित्सा विधियों, योग अभ्यासों और शुद्ध खान-पान को आय का जरिया बनाया है। एक्ट संस्था के सहयोग से यहां हीलिंग विलेज की अवधारणा को धरातल पर उतारा गया।


महिला सशक्तिकरण और पर्यटन के नए आयाम

इस पुरस्कार का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला सशक्तिकरण भी है। योगिनी स्टे का पूरा ढांचा ग्रामीण महिलाओं के इर्द-गिर्द बुना गया है। होमस्टे चलाने से लेकर आने वाले मेहमानों को स्थानीय व्यंजन परोसने और उन्हें पारंपरिक योग सिखाने तक की जिम्मेदारी महिलाएं बखूबी निभा रही हैं। इससे न केवल गांव की अर्थव्यवस्था सुधरी है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। पर्यटन के इस माडल ने यह साबित कर दिया है कि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी अब पहाड़ के ही काम आ रही है। 


वैश्विक मंच पर हिमालयी राज्यों का दबदबा

सम्मेलन में केवल हिमाचल ही नहीं, बल्कि समूचे हिमालयी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की गूंज सुनाई दी। चमीनू के साथ-साथ कलिम्पोंग के पुदुंग, पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी स्थित कैंपिंग डी डुआर्स, दक्षिण सिक्किम के मालमथांग, दार्जिलिंग के धरती फार्मस्टे और मणिपुर की लोकतक झील जैसे क्षेत्रों के योगिनी स्टे को भी आमंत्रित किया गया था। यह इस बात का संकेत है कि अब पर्यटन केवल साइट सीइंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक्सपीरियंस यानी अनुभव आधारित हो गया है।


क्या कहते हैं विशेषज्ञ

पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि चमीनू क्षेत्र को मिला यह सम्मान हिमाचल प्रदेश में 'रिवर्स माइग्रेशन' (गांवों की ओर वापसी) की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। जब ग्रामीण क्षेत्रों में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर का सम्मान और रोजगार मिलेगा, तो युवाओं का शहरों की ओर पलायन रुकेगा। इंडियन योगिनी एसोसिएशन की अध्यक्ष डा. एम लता ने कार्यक्रम के समापन पर कहा कि चमीनू जैसे क्षेत्र दुनिया के लिए एक उदाहरण हैं कि कैसे हम पर्यावरण का संरक्षण करते हुए अपनी आर्थिकी को मजबूत कर सकते हैं। यह माडल आने वाले समय में हिमालयी क्षेत्र के अन्य गांवों के लिए लाइटहाउस (मार्गदर्शक) का काम करेगा।

यह सम्मान हमारे गांव की उस प्राचीन विरासत का है, जिसे हमारे बुजुर्गों ने संजोकर रखा था। आज जब दुनिया तनाव और बीमारियों से जूझ रही है, तब चमीनू क्षेत्र अपने पारंपरिक योगिनी होमस्टे के जरिए लोगों को मानसिक और शारीरिक शांति प्रदान कर रहा है। एक्ट संस्था के संस्थापक राज बासु की अवधारणा ने हमें सिखाया कि कैसे हम अपनी संस्कृति को बिना नुकसान पहुंचाए उसे स्वरोजगार का माध्यम बना सकते हैं। 

रेनू शर्मा, एचटूओ हाउस।  

नाट आन मैप संस्था की ओर से बड़े पैमाने टिकाऊ व जिम्मेदार पर्यटन सहित अन्य विषयों पर कार्य किया जा रहा है। चमीनू गांव का अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मानित होना हमारे उस विजन की जीत है, जिसके तहत हमने ग्रामीण और अनछुए क्षेत्रों की अनूठी संस्कृति को दुनिया के सामने लाने का संकल्प लिया था। हमारा उद्देश्य केवल पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि गांवों के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और वहां की गौरवशाली विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना है। 

कुमार अनुभव, संस्थापक नाट आन मैप। 

एक्ट संस्था हमेशा से ग्रामीण भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति को विश्व पटल पर लाने के लिए प्रतिबद्ध रही है। चमीनू की यह सफलता दर्शाती है कि लक्जरी आफ सादगी' और समुदाय आधारित पर्यटन ही भविष्य की असली दिशा है। इस उपलब्धि का सबसे महत्वपूर्ण पहलू महिला सशक्तिकरण है। हमारा उद्देश्य प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सतत और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

तनिष्का, एक्ट संस्था।

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