भारत सरकार का लाल फीता शाही रेल प्रशासन आश्वासन देने के बावजूद भी धरातल पर खरानहीं उतरा
भारत सरकार का लाल फीता शाही रेल प्रशासन आश्वासन देने के बावजूद भी धरातल पर खरानहीं उतरा
नूरपुर : विनय महाजन /
नूरपुर हिमाचलप्रदेश के जिला काँगड़ा मे बहुचर्चित पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग पर ट्रेनों की बहाली का इंतजार कर रहे कांगड़ा घाटी के लोगों को एक बार फिर मायूसी हाथ लगी। रेलवे विभाग द्वारा आश्वासन दिए जाने के बाद बावजूद भी आज तक कांगड़ा रेल घाटी में रेलों की आगजई न हो सकी l रेल विभाग ने मामले में की आश्वासन दिया था कि ट्रेनों का शुभारंभ जनहित में शीघ्र किया जाएगाl उधर रेलविभाग ने जनता की भावनाओं को देखते हुए तीन जोड़ी ट्रेनों के संचालन की संभावित समयसारिणी जारी किए जाने के बावजूद इस रूट पर कोई ट्रेन चलने के कारण रेलवे विभाग के लाल फीता शाही प्रशासन की कथनी और करनी देखने को मिलाl इस मामले मे जन समुदाय का कहना है कि आश्वासन देने के बावजूद भी आखिरकार रेल प्रशासन कांगड़ा वैली में रेल का संचालन क्यों नहीं कर सका? जनसमुदाय का यह भी कहना है कि अगले हफ्ते से नवरात्रों का शुभारंभ हो रहा है और शक्तिपीठ स्थल पर जाने वाले पर्यटकों की भारी भीड़ इस रेल के माध्यम से आएगी l ऐसे अनेको प्रश्न जनता की जुवान पर चर्चा का विषय वने हुए है कि क्या ट्रायल के नाम पर रेलवे विभाग के कुछ मुलाजिम शक्तिपीठ स्थल की पिकनिक का आनंद ले रहे हैं कांगड़ा रेल वैली में l क्षेत्र में आज भी लोग कई स्थानों पर रेलवे स्टेशनों पर ट्रेन का इंतजार करते रहे लेकिन बाद में पता चला कि तकनीकी कारणों के चलते फिलहाल सेवा शुरू नहीं की जा पा रही है।ट्रेनों के निर्धारित दिन नहीं चलने से यात्रियों में निराशा देखने को मिली और रेलवे की कार्यप्रणाली व कार्यकुशलता पर सवाल खड़े होने लगे।लोगों का कहना है कि अगर इतने महीनों से निरीक्षण और ट्रायल चल रहे थे तो समयसारिणी जैसी बुनियादी त्रुटियां पहले ही क्यों दूर नहीं की गईं। गौर तलव है कि 6 मार्च को पहले चरण में इस रूट पर तीन जोड़ी ट्रेनों के संचालन की प्रस्तावित अधिसूचना जारी की गई थी। इसके अनुसार पठानकोट से सुबह 5 बजे, सुबह 7 बजे और दोपहर 2:40 बजे ट्रेनें बैजनाथ पपरोला के लिए रवाना होनी थीं। वहीं बैजनाथ पपरोला से सुबह 6 बजे, दोपहर 2:15 बजे और शाम 3:40 बजे ट्रेनें चलनी प्रस्तावित थीं।इससे पहले 24 फरवरी को रेल सुरक्षा आयुक्त दिनेश चंद देशवाल ने तकनीकी टीम के साथ पठानकोट से बैजनाथ पपरोला तक छह कोच वाली ट्रेन का सफल ट्रायल किया था। इसके बाद 28 फरवरी को ओएमएस उपकरण से पूरे ट्रैक का निरीक्षण भी किया गया। वहीं 1 मार्च से परीक्षण के तौर पर चार कोच वाली ट्रेन रोजाना पठानकोट से जोगिंद्रनगर तक अप-डाउन कर रही है। क्षेत्र में दूसरी तरफ़ यह असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार बैजनाथ रेलवे स्टेशन पर लगभग 70 प्रतिशत स्टाफ की कमी भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है। अभी कुछ दिन पहले भारत सरकार के रेल राज्य मंत्री पठानकोट दौरे पर आए थे लेकिन मौके पर मौजूद प्रशासन अगर कांगड़ा रेल वैली की समस्या के बारे में अवगत करवा देता शायद समस्या का समाधान हो जाता l

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