छरड़ा नाला श्मशानघाट विवाद: अस्थायी समझौते के बाद मामला शांत, 7 दिन में समाधान का आश्वासन

छरड़ा नाला श्मशानघाट विवाद: अस्थायी समझौते के बाद मामला शांत, 7 दिन में समाधान का आश्वासन


 नगरोटा सूरियां : प्रेम स्वरूप शर्मा /

पंचायत स्पेल के पास छरडा नाला बस्ती व राजकीय बरिष्ठ माध्यमिक स्कूल स्पेल के मध्य श्मशानघाट के निर्माण को लेकर छिड़ा बिबाद फिलहाल अस्थायी समझौते के बाद थम गया है। पुलिस ने दोनों पक्षो को सुनने के बाद श्मशानघट के मामले को एसडीएम जवाली से सात दिन के भीतर सुलझाने का आश्वासन देकर दोनों पक्षो को शांत कर दिया।

वुधवार को श्मशाअनघाट के विरोध पक्ष में सपेल व समर्थन में गलुआ के ग्रामीणों ने पुलिस चौकी पहुँच कर जमकर हंगामा किया। 

पुलिस थाना जवाली के एसएचओ ने नगरोटा सूरियां पुलिस चौकी पहुंच कर दोनों पक्षो को शांत किया और दोनों पक्षो को सुनने के बाद कहा कि फिलहाल बिबादित श्मशाघाट पर कोई भी दाह संस्कार नहीं किया जाएगा ज़ब तक इसका कोई स्थाई हल नहीं हो जाता। एसएचओ ने कहा कि इस बारे जवाली के एसडीएम से बात की जाएगी और श्मशानघट निर्माण स्थल पर जाँच के बाद बिबाद का हल किया जाएगा।

बीते शनिवार को स्पेल गांव के ग्रामीणों ने पुलिस चौकी नगरोटा सूरियां पहुँच कर शिकायत की थी कि गांव गलुआ का एक युवक छरडा नाला के पास वन विभाग की भूमि पर ग्रामीणों के विरोध के बाबजूद जबरन श्मशानघट बनाने पर अडिग है। उन्होंने बताया कि यही नहीं गलुआ की एक मृतक महिला का भी दाह संस्कार इस नए श्मशानघट पर कर दिया गया। ग्रामीणों गोपाल दास, शिमला देवी, विजय कुमारी, बिंता देवी, जीवन कुमार, अनु शर्मा, जीत सिंह, संधुरु लाल, सुभाष चंद, रवि, संजू, मुकेश शर्मा आदि ने आरोप लगाया कि हंसराज, विपन शर्मा, तिलक राज, कुलदीप राज, मनोहर सिंह 08 मार्च को चुपके से एक महिला की लाश को जबरन उनके घरों के सामने छरडा नाला में वन विभाग की समतल भूमि पर जला दिया और महिलाओं ने ज़ब रोकने कि कोशिश कि तो उन्हें डरा धमका कर भगा दिया।

पुलिस ने शिकायतकर्ता सपेल के ग्रामीणों की बात को सुनने के बाद दोनों पक्षो को वुधवार को पुलिस चौकी बुलाया।

छरड़ा नाला में बिबादित श्मशानघट निर्माण का विरोध कर रहे सपेल के ग्रामीणों का तर्क है कि यह जगह गांव कि आवादी व राजकीय बरिष्ठ माध्यमिक स्कूल सपेल के निकट है। जबकि विरोध पक्ष गलुआ के ग्रामीणों हंसराज, विपन शर्मा, तिलक राज, कुलदीप राज, मनोहर सिंह का कहना है कि पहले भी छरड़ा नाला के पास इस भूमि पर दाह संस्कार किया जाता रहा है और यह जमीन कटोरा पंचायत के अधीन आती है। इसलिए यहाँ श्मशानघाट बनाने का विरोध करना तर्कहीन है।

बिबादित श्मशानघाट की जमीन वन विभाग की है और वन विभाग ने उस जगह कि तारबंदी कर दी है।

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