स्मृतियों में अमर जनता के दिलों के सम्राट थे फील्ड मार्शल सत महाजन--
स्मृतियों में अमर जनता के दिलों के सम्राट थे फील्ड मार्शल सत महाजन
(नूरपुर:-विनय महाजन)
नूरपुर हिमाचल प्रदेश की राजनीति में स्वर्गीय सत महाजन का नाम आज भी सम्मान, आत्मीयता और श्रद्धा के साथ लिया जाता है। 30 जुलाई 1927 को जन्मे और 1 सितंबर 2012 को इस संसार को अलविदा कहने वाले सत महाजन दिग्गज कांग्रेसी नेता, पूर्व मंत्री और "कांगड़ा के फील्ड मार्शल" के रूप में विख्यात थे। लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान यह थी कि वे जनता के दिलों के सम्राट थे।उनका व्यक्तित्व अद्भुत, करिश्माई, सहज और अत्यंत जनप्रिय था। नूरपुर विधानसभा क्षेत्र का शायद ही कोई व्यक्ति होगा जिसे वे नाम से न जानते हों। लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनना उनकी आदत नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य था। राजनीति उनके लिए सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा का पवित्र संकल्प थी। नूरपुर में आर्य समाज म को विकसित करने में सत महाजन का काफी योगदान रहा है l उन्होंने जोधपुर आर्य समाज मंदिर में काफी नेत्र शिविर लगाए l उनकी राजनीति एक स्वच्छ ईमानदार की प्रतीक थी आज की तरह नहीं कोई व्यापारिक उद्योग बनाकर की जाएl भाजपा के शीर्ष नेता शांता कुमार उनके परम मित्र राजनीति में रहे l
सत महाजन सामाजिक समरसता के सच्चे प्रतीक थे। उन्होंने कभी जाति, धर्म, वर्ग या ऊँच-नीच के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। हर घर उनके लिए अपना था और हर व्यक्ति सम्मान का अधिकारी। वे बिना किसी संकोच के हर वर्ग के लोगों के घर जाते, उनके साथ बैठते और भोजन ग्रहण करते थे। यही मानवीय संवेदनाएँ उन्हें एक असाधारण जननेता बनाती थीं।उनकी वाणी में मिठास, मधुरता और अपनापन झलकता था। लोकसभा या विधानसभा हो या जनसभा, जनहित के मुद्दों पर बोलते समय उनकी भाषा संयमित, प्रभावशाली और तथ्यों पर आधारित होती थी। वे अपनी वाणी पर अद्भुत नियंत्रण रखते थे। यही कारण था कि राजनीतिक विरोधी भी उनके व्यक्तित्व, शालीनता और कार्यशैली के प्रशंसक थे। उन्होंने जिन-जिन लोगों को सत्ता का सुख दिया उन्होंने ही उनकी राजनीति में पुत्र को आगे लाने के लिए भीतरघात किया उसके बावजूद भी उन्होंने अपना विरोधाभास नहीं जताया l मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भी हो शामिल रहे लेकिन भीतर घातियों ने उनके साथ नहीं दिया l राजनीति की लड़ाई उन्होंने संघर्षमय लड़ी l प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सखू जो कभी प्रदेश कांग्रेस संगठन में उनके महासचिव थे उन्होंने यह प्लांट उसे समय लगाया l *आज नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में जितना भी विकास है और सब उनकी देन है आज तक कोई भी विधायक नूरपुर के विकास को आगे नहीं बढ़ा सका स्वार्थ की राजनीति की गई जबकि वह स्वार्थ की राजनीति नहीं करते थे l स्वर्गीय सत महाजन की मृत्यु के बाद उनके पुत्र अजय महाजन को लोगों ने उसे समय नूरपुर का विधायक बनाया लेकिन उन्होंने 5 साल नूरपुर को विकसित करने के मास्टर प्लान बनाएं उसके बाद वह दो बार विधानसभा क्षेत्र का चुनाव हार गये जिसका कारण लोगों ने बताया कि सत महाजन के वोट बैंक पर पकड़ नहीं बना सके *
**छात्र जीवन से ही वे राजनीति में सक्रिय रहे और भारतीय युवा कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए। वे तीन बार हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बने। नूरपुर नगर नगर परिषद के अध्यक्ष के रूप में पाँच बार सेवा दी तथा 1977, 1982, 1985, 1993 और 2003 में विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 1996 में उन्होंने लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में भी नूरपुर और हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।प्रदेश सरकार में उन्होंने राजस्व, परिवहन, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज तथा सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। ग्रामीण विकास, सड़क, पेयजल और पंचायती राज को नई दिशा देने में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा। वर्ष 2003 में उन्हें सहकारिता क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैकुंठ भाई मेहता पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो उनके दूरदर्शी नेतृत्व और जनसेवा का राष्ट्रीय सम्मान था।लगभग पाँच दशकों तक सक्रिय राजनीति में रहने के बाद उन्होंने 2007 में चुनावी राजनीति से संन्यास लिया। आज भले ही वे हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनकी सादगी, विनम्रता, जनसेवा, विकास की सोच और मानवीय संवेदनाएँ आज भी लोगों के हृदय में जीवित हैं। नूरपुर की मिट्टी, कांगड़ा की राजनीति और हिमाचल प्रदेश का जनमानस स्वर्गीय सत महाजन को सदैव एक ऐसे जननायक के रूप में याद रखेगा, जिसने सत्ता से अधिक समाज को महत्व दिया और अपने पीछे सेवा, सौहार्द, सादगी तथा जनविश्वास की अमूल्य विरासत छोड़ गया।

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