प्याज की कीमतों में भारी उछाल: नासिक मंडी में दाम 76 प्रतिशत तक बढ़े, रसोई का बजट फिर बिगड़ा
प्याज की कीमतों में भारी उछाल: नासिक मंडी में दाम 76 प्रतिशत तक बढ़े, रसोई का बजट फिर बिगड़ा
नई दिल्ली: देश में प्याज की कीमतों ने एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। महाराष्ट्र के प्रमुख प्याज बाजार नासिक में पिछले एक महीने के भीतर प्याज के थोक दामों में लगभग 76 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। महीने भर पहले जहां नासिक मंडी में प्याज का थोक भाव करीब 2,050 रुपये प्रति क्विंटल था, वहीं अब यह बढ़कर 3,600 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गया है। इस बेकाबू होती महंगाई का सीधा असर आम आदमी की रसोई और घरेलू बजट पर पड़ रहा है।
क्यों आसमान छू रहे हैं प्याज के दाम?
खरीफ बुवाई और आवक में देरी: मानसून की अनिश्चितता और खराब मौसम के चलते खरीफ प्याज की बुवाई और नई फसल की आवक में देरी हुई है, जिससे मंडियों में उपलब्धता कम हो गई है।
रबी फसल का घटता स्टॉक: इस समय रबी फसल का पुराना भंडार धीरे-धीरे कम हो रहा है और नया स्टॉक पूरी तरह बाजार में नहीं आया है। अगस्त-सितंबर के दौरान हर साल इस अंतर के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ता है।
सरकारी बफर स्टॉक पर असर: खुले बाजार में बेहतर दाम मिलने के कारण किसानों ने सरकारी एजेंसियों की बजाय खुले बाजार में प्याज बेचा, जिससे इस बार सरकारी बफर स्टॉक का लक्ष्य प्रभावित हुआ है।
विभिन्न राज्यों में दिख रहा असर
थोक और खुदरा बाजारों में तेजी आने से देश के कई राज्यों में प्याज के दाम काफी बढ़ गए हैं। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, झारखंड, पंजाब और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में खुदरा कीमतें 40 से 60 रुपये प्रति किलो के दायरे में पहुंच गई हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि देश में कुल प्याज उत्पादन पिछले साल के मुकाबले लगभग समान स्तर पर ही रहने का अनुमान है।
आगे क्या राहत मिलने की उम्मीद?
विशेषज्ञों और प्रशासनिक रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार बढ़ते दामों को नियंत्रित करने के लिए बफर स्टॉक के प्याज को खुले बाजार और प्रमुख खुदरा केंद्रों पर उतारने की तैयारी कर रही है। यदि आने वाले हफ्तों में खरीफ की नई फसल की आवक में तेजी आती है, तो उपभोक्ताओं को महंगाई से कुछ राहत मिल सकती है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें