युवा बचाओ और पर्यावरणीय चुनौतियों पर वैज्ञानिक चेतना का संदेश

 युवा बचाओ और पर्यावरणीय चुनौतियों पर वैज्ञानिक चेतना का संदेश


मंडी : अजय सूर्या /

हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति एवं तकनीकी विकास समिति के संयुक्त तत्वावधान में पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पनारसा के सभागार में ‘युवा बचाओ व पर्यावरणीय चुनौतियों के संदर्भ में वैज्ञानिक चेतना’ विषय पर कार्यशाला एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों सहित करीब 80 लोगों ने भाग लिया।


हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति जिला इकाई के अध्यक्ष नवल किशोर शर्मा ने बताया कि समिति वर्ष 1992 से शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, महिला-पुरुष समानता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और युवा बचाओ जैसे जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि समिति ने पॉलीथिन हटाओ, बेटी बचाओ, खेती बचाओ और युवा बचाओ जैसे अभियानों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का प्रयास किया है।


समिति के सचिव गजेंद्र शर्मा ने युवाओं से नशे और गलत संगति से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के विकास में युवा शक्ति की भूमिका निर्णायक है। सही दिशा और अवसर मिलने पर युवा देश के विकास की महत्वपूर्ण शक्ति बन सकते हैं, जबकि दिशा के अभाव में यही शक्ति समाज के लिए चुनौती भी बन सकती है।


कार्यक्रम के दौरान अंधश्रद्धा निर्मूलन आंदोलन के अग्रदूत डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की पुण्यतिथि के अवसर पर राष्ट्रीय वैज्ञानिक चेतना दिवस भी मनाया गया। तकनीकी विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. विजय विशाल ने डॉ. दाभोलकर के जीवन और सामाजिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा विवेकपूर्ण सोच को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।


तकनीकी विकास समिति के सचिव एवं अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क के राष्ट्रीय पदाधिकारी जोगिंद्र वालिया ने कहा कि इस वर्ष वैज्ञानिक चेतना को पर्यावरणीय चुनौतियों से जोड़कर देखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल सहित हिमालयी राज्यों में बिगड़ता पर्यावरणीय संतुलन गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। बढ़ते तापमान और वर्षा के बदलते स्वरूप का असर कृषि एवं बागवानी पर भी पड़ रहा है, जिससे फसल चक्र प्रभावित होने के साथ पारंपरिक फसलों के सामने भी चुनौतियां बढ़ रही हैं।


विद्यालय की प्रभारी रजनी शर्मा और प्रवक्ता दुर्गा सिंह ठाकुर ने शिक्षा, शिक्षकों और विद्यार्थियों की वैज्ञानिक चेतना के प्रसार में भूमिका पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया।

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