आईआईटी मंडी में 3 से 6 जून तक होगा अंतरराष्ट्रीय मन, मस्तिष्क एवं चेतना सम्मेलन-2026
आईआईटी मंडी में 3 से 6 जून तक होगा अंतरराष्ट्रीय मन, मस्तिष्क एवं चेतना सम्मेलन-2026
डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम और पंडित अजय चक्रवर्ती की विशेष प्रस्तुतियां रहेंगी आकर्षण का केंद्र
मंडी : अजय सूर्या /
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मंडी में 3 से 6 जून 2026 तक तृतीय अंतरराष्ट्रीय मन, मस्तिष्क एवं चेतना सम्मेलन-2026 का आयोजन किया जाएगा। चार दिवसीय इस सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, विद्यार्थी, आध्यात्मिक चिंतक और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ भाग लेंगे। संस्थान के सुंदर एवं प्राकृतिक वातावरण से घिरे कमांड परिसर में होने वाला यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।
सम्मेलन का आयोजन आईआईटी मंडी के भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं मानसिक स्वास्थ्य अनुप्रयोग केंद्र द्वारा किया जा रहा है। इसमें चेतना, संज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य और मानव कल्याण जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। आयोजन के दौरान 250 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे, जबकि 18 मुख्य व्याख्यान, 8 आमंत्रित व्याख्यान, 3 पैनल चर्चाएं, कार्यशालाएं और विभिन्न अंतर्विषयक सत्र भी होंगे।
सम्मेलन का मुख्य आकर्षण पद्मा सुब्रह्मण्यम और अजय चक्रवर्ती की विशेष उपस्थिति रहेगी। पद्म विभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम 3 जून को उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि होंगी और शाम को अपने दल के साथ विशेष नृत्य प्रस्तुति देंगी। वहीं पद्म भूषण से सम्मानित हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रख्यात गायक पंडित अजय चक्रवर्ती 4 जून को मुख्य व्याख्यान देने के साथ शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति भी देंगे।
सम्मेलन में अमेरिका, ब्रिटेन, बेल्जियम, मेक्सिको और इज़राइल सहित कई देशों के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और विद्वान भाग लेंगे। इनमें प्रोफेसर स्टुअर्ट हैमेरॉफ, प्रोफेसर जॉर्जियो अस्कोली, प्रोफेसर दिमित्रिस पिनोटसिस, प्रोफेसर पीटर-जान मैस, प्रोफेसर जोसेफा बेसेरा गोंजालेज़ और प्रोफेसर इत्हामार थियोडोर जैसे नाम शामिल हैं। भारत से भी कई प्रमुख विद्वान और विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे।
आईआईटी मंडी के निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में चेतना को मूलभूत वास्तविकता माना गया है। मन, मस्तिष्क और चेतना का समन्वित अध्ययन मानव कल्याण को समझने के साथ-साथ अल्ज़ाइमर, पार्किंसन और डिमेंशिया जैसी बीमारियों से जुड़े अनुसंधानों को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच वैश्विक संवाद को और मजबूत करेगा।
उहल नदी के शांत प्राकृतिक परिवेश में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन वैज्ञानिक उत्कृष्टता, भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और अंतर्विषयक शोध का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा। आयोजकों ने मीडिया प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, उद्योग जगत से जुड़े लोगों तथा आम नागरिकों को इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है।

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