तबला साधना के नक्षत्र: पं. कश्मीरी लाल
तबला साधना के नक्षत्र: पं. कश्मीरी लाल
हिमाचल प्रदेश के सोलन ज़िले के कोटला क्षेत्र के निवासी, प्रख्यात तबला वादक एवं संगीत गुरु पं. कश्मीरी लाल (जन्म: 1 अक्टूबर 1956) का भारतीय शास्त्रीय संगीत, विशेषकर तबला विद्या के क्षेत्र में योगदान अत्यंत सराहनीय एवं अमूल्य रहा है।
पं. कश्मीरी लाल, महान तबला आचार्य उस्ताद लक्ष्मण सिंह सेन एवं उस्ताद इक़बाल मोहम्मद ख़ान साहब के शिष्य रहे हैं तथा वे पंजाब घराने की समृद्ध परंपरा से जुड़े हुए हैं। विगत 45 वर्षों से अधिक समय से वे निरंतर संगीत साधना करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा के तहत विद्यार्थियों को तबला की तालीम दे रहे हैं।
आज हिमाचल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश-विदेश में उत्कृष्ट तबला वादन कर रहे अनेक कलाकार पं. कश्मीरी लाल के शिष्य हैं, जो विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों से प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
25 जनवरी 2026 को दिल्ली में स्वरांजलि संस्था द्वारा आयोजित समारोह में पं. कश्मीरी लाल को उनके आजीवन योगदान के लिए “नक्षत्र सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत संगीत साधना का प्रतीक है, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध संगीत परंपरा के लिए भी गौरव का विषय है।
तबला विद्या के संरक्षण, संवर्धन एवं भावी पीढ़ी को प्रशिक्षित करने में पं. कश्मीरी लाल का योगदान सदैव अनमोल और प्रेरणादायक रहेगा।


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