शिमला पुलिस के जवान ने देवदूत बनकर बचाई महिला की जान, सतलुज नदी में छलांग लगाकर निकाला सुरक्षित
शिमला पुलिस के जवान ने देवदूत बनकर बचाई महिला की जान, सतलुज नदी में छलांग लगाकर निकाला सुरक्षित
शिमला : गायत्री गर्ग /
शिमला पुलिस के एक जांबाज जवान ने अपनी जान की परवाह न करते हुए उफनती सतलुज नदी में कूदकर एक महिला की जान बचाकर इंसानियत और बहादुरी की मिसाल पेश की है। इस साहसिक कार्य की हर तरफ सराहना हो रही है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, 31 मार्च 2026 को दोपहर करीब 12:59 बजे थाना में सूचना प्राप्त हुई कि वजीर बावड़ी पुल से एक महिला छलांग लगाने का प्रयास कर रही है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम बिना समय गंवाए तुरंत मौके के लिए रवाना हुई।
जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो वहां किनारे पर बैठी महिला ने अचानक उफनती सतलुज नदी में छलांग लगा दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर तैनात आरक्षी सतपाल (न. 293) और महिला आरक्षी शीतल (न. 426) ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया।
सतलुज की लहरों से जंग
बिना एक पल की देरी किए, आरक्षी सतपाल ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए नदी के तेज बहाव में छलांग लगा दी। भारी मशक्कत के बाद उन्होंने महिला को सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया। महिला आरक्षी शीतल ने भी इस रेस्क्यू ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वर्तमान स्थिति
पुलिस टीम द्वारा सुरक्षित बाहर निकाली गई महिला वर्तमान में जीवित है और उन्हें तुरंत उपचार के लिए खनेरी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।
पुलिस विभाग का बढ़ा मान
इस वीरतापूर्ण कार्य पर शिमला पुलिस विभाग ने गर्व व्यक्त किया है। अधिकारियों का कहना है कि:
"आरक्षी सतपाल ने न केवल एक अनमोल मानव जीवन की रक्षा की है, बल्कि अपने अदम्य साहस से समाज में पुलिस की छवि को और अधिक सुदृढ़ बनाया है। इस कार्य से सम्पूर्ण पुलिस परिवार गौरवान्वित महसूस कर रहा है।"
सोशल मीडिया और स्थानीय जनता के बीच आरक्षी सतपाल और शीतल की इस बहादुरी को जमकर सराहा जा रहा है। निश्चित रूप से ऐसे जांबाज सिपाही ही पुलिस की वर्दी की गरिमा को "चार चांद" लगाते हैं।

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