60 की उम्र में 25 के दिखें, कुंभक प्राणायाम का गुप्त विज्ञान, आयु बढ़ाने और कायाकल्प का गुप्त विज्ञान

 

यह स्रोत कुंभक प्राणायाम के प्राचीन और वैज्ञानिक आधार की व्याख्या करता है, जो सांसों को रोककर आयु को रिवर्स करने और शरीर का कायाकल्प करने की क्षमता रखता है। इस प्रक्रिया में सांस की गति को धीमा करके बायोलॉजिकल उम्र को नियंत्रित करने पर बल दिया गया है, क्योंकि धीमी सांसें कोशिका क्षरण को रोकती हैं और मानसिक शांति प्रदान करती हैं। लेख के अनुसार, कुंभक के अभ्यास से शरीर में बोहर इफेक्ट और यूथ हार्मोन सक्रिय होते हैं, जो स्टेम सेल्स को जागृत कर आंतरिक मरम्मत और चेहरे पर तेज लाते हैं। अंततः, यह तकनीक केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि वर्तमान क्षण में जीने और चेतना को स्थिर करने की एक आध्यात्मिक कला है, जो एक 60 वर्षीय व्यक्ति को भी युवा जैसी ऊर्जा दे सकती है।

क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ हिमालय योगी 100 साल की उम्र में भी युवाओं जैसी असीम ऊर्जा शारीरिक लचीलापन और चेहरे पर अद्भुत चमक कैसे बनाए रखते हैं क्या वाकई यह संभव है कि इंसान अपनी ढलती हुई उम्र को रोक दे और 60 साल की आयु में भी 25 साल के युवा जैसा जीवंत और स्वस्थ दिखे आज हम एक ऐसी अत्यंत रहस्यमई प्राचीन और शक्तिशाली विद्या की गहराइयों में उतरेंगे जो समय के पहिए को उल्टा घुमाने का सामर्थ्य रखती है वीडियो शुरू करने से पहले एक जरूरी डिस्क्लेमर यह वीडियो प्राचीन भारतीय ग्रंथों वैज्ञानिक शोधों मनोविज्ञान और आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित है इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार के अंधविश्वास को बढ़ावा देना या किसी चिकित्सीय पद्धति का विकल्प देना नहीं है स्वास्थ्य या ध्यान संबंधी किसी भी नए प्रयोग को करने से पहले अपने विवेक का इस्तेमाल करें और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें बल्कि हमारे ही भीतर छिपी एक ऐसी ठोस वैज्ञानिक और आध्यात्मिक सच्चाई है जिसे सदियों से आम इंसानों की पहुंच से दूर रखा गया दरअसल उम्र का बढ़ना यानी एजिंग केवल शरीर की कोशिकाओं का क्षरण या कैलेंडर के पन्नों का पलटना नहीं है बल्कि यह एक गहरा मनोवैज्ञानिक और तार्किक सत्य भी है मनोविज्ञान कहता है कि इंसान उतना ही बूढ़ा होता है जितना वह खुद को भीतर से महसूस करता है लेकिन हमारी आधुनिक जीवन शैली डर और भागदौड़ ने हमारी श्वास की गति को इतना तेज और उथला कर दिया है कि हमारा शरीर हर पल फाइट और फ्लाइट यानी भारी तनाव की स्थिति में रहता है क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब आप क्रोधित डरे हुए या चिंतित होते हैं तो आपकी सांसे कितनी बेतरतीब और तेज चलने लगती हैं विज्ञान भी अब इस बात को पूरी तरह से स्वीकार करता है कि क्रोनोलॉजिकल उम्र यानी कैलेंडर के अनुसार आपकी उम्र और बायोलॉजिकल उम्र यानी आपके शरीर के अंगों और कोशिकाओं की वास्तविक उम्र इन दोनों में बहुत बड़ा अंतर हो सकता है इसी बायोलॉजिकल उम्र को कायाकल्प के जरिए वापस लौटाने का गुप्त राज हमारे वैदिक ऋषियों ने हजारों साल पहले ही अपनी चेतना की प्रयोगशाला में खोज लिया था इस परम रहस्य का नाम है कुंभक महाविद्या यह कोई साधारण प्राणायाम या केवल सांस लेने और छोड़ने की क्रिया नहीं है बल्कि प्राणों को शरीर के भीतर एक विशेष अवस्था में ठहराने की परम वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कला है हमारे प्राचीन और पवित्र ग्रंथों जैसे श्वेताश्वत उपनिषद हठ योग प्रदीपिका और योग वाशिष्ट में बहुत ही स्पष्ट रूप से यह उल्लेखित है कि चले वाते चलन चित्तम निश्चले निश्चलम भवेत जिसका अर्थ है कि जब श्वास चलती है तो मन चंचल होता है और जब श्वास स्थिर हो जाती है कुंभक के माध्यम से तो मन भी पूरी तरह स्थिर हो जाता है जब मन और प्राण दोनों एक साथ ठहर जाते हैं तो शरीर के अंदर ऊर्जा का अनावश्यक खर्च बंद हो जाता है और कोशिकाओं का टूटना यानी बुढ़ापा वहीं रुक जाता है इसे आप बहुत ही सरलता से यूं समझें कि जब आप सही तरीके से सांस को रोकते हैं तो आप दरअसल अपने भीतर समय के प्रभाव को ही कुछ पलों के लिए रोक देते हैं यह कोई पौराणिक कथा नहीं है बल्कि एक ऐसा शाश्वत ब्रह्मांडीय नियम है जिसे आज का आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के कम होने और सेलुलर रिपेयर की प्रक्रिया के रूप में देख रहा है इसे एक बहुत ही तार्किक और प्राकृतिक उदाहरण से समझते हैं जो आपको यह सोचने पर मजबूर कर देगा कि प्रकृति कैसे काम करती है प्रकृति में जो जीव जितनी तेजी से सांस लेता है उसकी उम्र उतनी ही कम होती है एक कुत्ता 1 मिनट में लगभग 20 से 30 बार सांस लेता है और उसकी औसत उम्र 10 से 15 साल होती है जबकि एक कछुआ 1 मिनट में केवल 3 से चार बार ही सांस लेता है और वह 150 से 300 साल तक पूर्ण स्वस्थ रहकर जीवित रहता है यह सीधा सा विज्ञान है जिसे हमारे योगियों ने सदियों पहले समझ लिया था कि ईश्वर ने हमें जीने के लिए साल या दिन नहीं दिए हैं बल्कि सांसों की एक निश्चित गिनती दी है जब हम कुंभक का नियमित और सही अभ्यास करते हैं तो हम अपनी सांसों की खपत को धीमा कर देते हैं जिससे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में शरीर के डीएनए डीएनए के सिरों पर मौजूद टेलोममेयर्स टेलोममेयर्स की लंबाई कम होने की गति बेहद धीमी पड़ जाती है यही टेलोममेयर्स वो बायोलॉजिकल घड़ियां हैं जो यह तय करती हैं कि इंसान कितनी जल्दी बूढ़ा होगा या कितने लंबे समय तक जवान बना रहेगा जब आप कुंभक लगाते हैं यानी सांस को भीतर या बाहर रोकते हैं तो शरीर के अंदर कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर एक नियंत्रित मात्रा में हल्का सा बढ़ने लगता है आधुनिक शरीर विज्ञान में इसे बोर प्रभाव बोहर इफेक्ट कहा जाता है इस प्रभाव के कारण आपके खून में मौजूद हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को ज्यादा आसानी से छोड़ने लगता है और वह जीवन दायनी शुद्ध ऑक्सीजन आपकी एक-एक मृत प्राय कोशिका आपके मस्तिष्क के कोने-कोने और आपकी त्वचा की गहराइयों तक पहुंचने लगती है यही वह गुप्त अवस्था है जहां असली कायाकल्प शुरू होता है शरीर अपनी मरम्मत खुद करने लगता है और चेहरे पर वह तेज आने लगता है जो किसी भी कॉस्मेटिक क्रीम से असंभव है लेकिन क्या यह विद्या सच में इतनी चमत्कारी है क्या आप इसके प्रभाव को इसी वक्त अभी अपने भीतर महसूस करना चाहते हैं तो वीडियो को बिना स्किप किए पूरे ध्यान से देखते रहिए क्योंकि अब मैं आपको एक सिद्ध गुरु की भांति एक ऐसा लाइव अभ्यास करवाने जा रहा हूं जिसका सीधा असर आपको अगले कुछ ही सेकंड्स में अपने शरीर और दिमाग में बहुत स्पष्ट रूप से महसूस होगा और वह अनुभव इतना अद्भुत होगा कि आप खुद हैरान रह जाएंगे चलिए अब उस सत्य का साक्षात अनुभव करते हैं जिसके बारे में हम बात कर रहे हैं आप इस समय जहां भी हैं और जैसे भी बैठे हैं कृपया अपनी रीड की हड्डी को बिल्कुल सीधा कर लें अपने कंधों को एकदम ढीला छोड़ दें और अपनी आंखें कोमलता से बंद कर लें अब अपने पेट और छाती को फुलाते हुए एक लंबी और गहरी सांस अपने भीतर लें अपनी पूरी क्षमता के साथ और अब अपनी सांस को भीतर ही रोक लें कोई जोर जबरदस्ती नहीं करनी है बस आराम से सांस को थाम कर रखें अब अपने पूरे ध्यान को अपने माथे के ठीक बीचोंबीच यानी आज्ञा चक्र पर लाएं और अपने हृदय की धड़कनों को महसूस करें क्या आपने एक बहुत ही रहस्यमई बात पर ध्यान दिया जब तक आपकी सांस रुकी हुई है आपके मन में कोई भी नया विचार नहीं आ रहा है कोई चिंता कोई तनाव भूतकाल का कोई दुख या भविष्य का कोई डर आपको इस पल छू भी नहीं पा रहा है आपका पूरा अस्तित्व एकदम शून्य और शांत हो गया है अब धीरे-धीरे पूरी शांति के साथ अपनी सांस को बाहर छोड़ दें और अपने शरीर को पूरी तरह से शिथिल हो जाने दें आंखें खोलने से पहले अपने पूरे शरीर और मस्तिष्क में दौड़ रही उस अद्भुत झनझनाहट उस ताजगी और उस असीम शांति को महसूस करें यह कोई भ्रम या जादू नहीं है यह वह क्षण था जब आपके शरीर और मन ने कुंभक के कारण एक अलौकिक शून्यता का अनुभव किया जैसे ही आपने सांस रोकी आपके मस्तिष्क को विचारों का जाल बुनने के लिए जो ऊर्जा चाहिए थी वह तुरंत कट गई मनोविज्ञान स्पष्ट रूप से कहता है कि इंसान के 90% रोग और बुढ़ापा उसके दिमाग में चलने वाले अनियंत्रित और नकारात्मक विचारों के कारण पैदा होते हैं सांस रुकते ही वह विचार श्रृंखला टूट गई और आपके नर्वस सिस्टम को एक गहरा रिसेट मिल गया अगर आपको इस छोटे से अभ्यास से ही अपने भीतर एक अद्भुत शांति एकाग्रता और एक नई ऊर्जा का हल्का सा भी एहसास हुआ है तो अभी इस वीडियो को लाइक करें ताकि मुझे यह पता चले कि आप इस ब्रह्मांडीय सत्य को केवल सुन नहीं रहे हैं बल्कि अपने भीतर महसूस भी कर पा रहे हैं अब जरा सोचिए जब केवल कुछ सेकंड के अभ्यास से शरीर और मन का ऐसा अद्भुत रूपांतरण हो सकता है तो इसके नियमित और सही तरीके से किए गए अभ्यास से क्या कुछ नहीं बदला जा सकता जब हम 60 की उम्र में 25 का दिखने की बात करते हैं तो इसके पीछे कायाकल्प का एक बहुत ही ठोस वैज्ञानिक और तार्किक आधार छिपा है जैसे ही आप कुंभक का अभ्यास करते हैं आपके शरीर की वेगस नर्व तुरंत सक्रिय हो जाती है यह वह अत्यंत महत्वपूर्ण नस है जो आपके मस्तिष्क को सीधे आपके हृदय और पाचन तंत्र से जोड़ती है वेगस नर्व के सक्रिय होते ही आपके शरीर में बुढ़ापा और तनाव पैदा करने वाले हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर तेजी से गिरने लगता है इसके साथ ही डीएचईए नामक एक विशेष हार्मोन का स्राव बढ़ जाता है जिसे आधुनिक चिकित्सा विज्ञान यूथ हार्मोन या जवानी का हार्मोन कहता है यही वो हार्मोन है जो आपकी त्वचा की झुर्रियों को मिटाने कोशिकाओं को जमा रखने और आपको भीतर से युवा बनाए रखने का मुख्य आधार है धार्मिक ग्रंथों और प्राचीन योग शास्त्रों में इस प्रक्रिया को और भी गहरे तथा रहस्यमय ढंग से समझाया गया है शिव संहिता और गोरक्ष शतक जैसे महान ग्रंथों में स्पष्ट वर्णन मिलता है कि हमारे मस्तिष्क के ऊपरी हिस्से से जिसे विज्ञान पीनियल ग्लैंड कहता है निरंतर एक दिव्य स्राव होता रहता है जिसे अमृत या सोम रस कहा गया है यह अमृत हर पल टपक कर हमारी नाभि में स्थित जठराग्नि यानी पाचन अग्नि में भस्म होता रहता है और इसी ऊर्जा के लगातार नष्ट होने से शरीर पर बुढ़ापा आता है और मृत्यु निकट आती है लेकिन जब एक साधक कुंभक के साथ विशिष्ट योगिक मुद्राओं का अभ्यास करता है तो उसकी प्राण वायु नीचे की ओर बहने के बजाय ऊपर की ओर उठने लगती है वह उस टपकते हुए जीवनदाई अमृत को अग्नि में जलने से रोक देती है जब यह अमृत शरीर में ही संरक्षित और अवशोषित होने लगता है तब इंसान का वास्तविक कायाकल्प शुरू होता है बाल फिर से काले होने लगते हैं त्वचा पर एक दिव्य चमक आ जाती है और इंसान 60 साल की उम्र में भी 25 साल के युवा जैसी स्फूर्ति और ऊर्जा प्राप्त कर लेता है आधुनिक विज्ञान की भाषा में इस पूरी प्रक्रिया को इंटरमिटेंट हाइपोक्सिया कहा जा सकता है जिसके अध्ययन और खोज पर वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार तक मिल चुका है जब आप कुंभक करते हैं तो शरीर में कुछ समय के लिए ऑक्सीजन का स्तर कम होता है जिसे देखकर शरीर का सर्वाइवल सिस्टम एकदम से अलर्ट हो जाता है और वह शरीर में सोई हुई स्टेम सेल्स को जगा देता है यह स्टेम सेल्स शरीर की वह मास्टर कोशिकाएं हैं जो किसी भी क्षतिग्रस्त अंग को नया बना सकती हैं आपकी पुरानी कोशिकाएं अपनी बीमार याददाश्त को भूलकर एक नई और युवा संरचना में ढलने लगती हैं लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल सांस को किसी भी तरह से रोकने भर से ही सब कुछ हो जाएगा बिल्कुल नहीं कुंभक की सही विधि क्या है इसे कब कैसे और कितनी मात्रा में करना चाहिए ताकि यह शरीर को कोई नुकसान ना पहुंचाए और हम वास्तव में अपनी उम्र को रिवर्स कर सकें इसका सबसे गुप्त और अंतिम रहस्य तो अभी बाकी है इससे पहले कि हम उस रहस्य की ओर बढ़े आप अभी कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं कि क्या आपने इससे पहले कभी अपने शरीर में सांस रुकने के बाद वाली उस गहरी शांति को महसूस किया था आपका जवाब मुझे यह समझने में मदद करेगा कि आप इस विद्या को कितनी गहराई से ग्रहण कर रहे हैं कुंभक की इस यात्रा में सबसे बड़ा और गहरा रहस्य इसकी विधि में नहीं बल्कि इसके अनुपात और अवस्था में छिपा है हमारे योग शास्त्रों में सांस लेने को पूरक सांस छोड़ने को रेचक और सांस को थामने को कुंभक कहा गया है यह थामना दो प्रकार का होता है अंतर कुंभक यानी सांस अंदर रोक कर रखना और बाह्य कुंभक यानी सांस पूरी तरह बाहर निकाल कर रोक देना इन दोनों में भी बाह्य कुंभक को अधिक रहस्यमई और शक्तिशाली माना गया है जब आप अपनी पूरी सांस बाहर निकालकर उसे वहीं रोक देते हैं तो शरीर के भीतर एक पूर्ण शून्यता की स्थिति उत्पन्न हो जाती है यह वही शून्यता है जिसे उपनिषदों में ब्रह्म अवस्था या तुरय अवस्था कहा गया है इस अवस्था में शरीर को यह भ्रम होने लगता है कि जीवन समाप्त हो रहा है और यही वह क्षण है जब आपका सर्वाइवल मैकेनिज्म अपनी सर्वोच्च शक्ति के साथ जागृत होता है यह अवस्था आपके भीतर के उस सोए हुए भीतरी वैद्य या प्राकृतिक हीलर को जगा देती है जो आपके शरीर की हर बीमारी हर मृत कोशिका और हर ब्लॉकेज को पलक झपकते ही ठीक करने की असीम क्षमता रखता है लेकिन यहां एक अत्यंत महत्वपूर्ण और तार्किक बात को समझना आवश्यक है कुंभक कोई जिम की कसरत नहीं है जहां आप जोर लगाकर या अपनी क्षमता से अधिक समय तक सांस रोक कर जल्दी जवान हो जाएंगे अगर आप बलपूक सांस रोकते हैं तो आपका हृदय घबराने लगेगा ब्लड प्रेशर बढ़ जाएगा और आपके नर्वस सिस्टम में कॉर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन का स्राव होने लगेगा जो फायदा पहुंचाने के बजाय आपको और अधिक बूढ़ा व बीमार कर देगा पतंजलि योग सूत्र में महर्षि पतंजलि स्पष्ट रूप से निर्देश देते हैं कि प्राणायाम और कुंभक दीर्घ यानी लंबा और सूक्ष्म यानी अत्यंत धीमा और बिना किसी तनाव के होना चाहिए एक सिद्ध कुंभक वो है जहां आपके चेहरे पर कोई तनाव ना हो आपके माथे पर कोई सिकुड़न ना हो और आपका शरीर एकदम रिलैक्स रहे इसे शुरू करने का सबसे सही और सुरक्षित तरीका यह है कि आप अपने पूरक और रेचक के समय को लंबा करें और बीच में केवल कुछ सेकंड्स का एक बहुत ही सहज और स्वाभाविक ठहराव लाएं जब यह ठहराव बिना किसी प्रयास के धीरे-धीरे अपने आप बढ़ने लगे तब इसे केवली कुंभक कहा जाता है जो कायाकल्प की सबसे उच्चतम और सुरक्षित अवस्था है विज्ञान और मनोविज्ञान के दृष्टिकोण से उम्र का बढ़ना केवल शरीर का नहीं बल्कि हमारी सोच का भी होता है जब तक आप भीतर से यह मानते रहेंगे कि आप बूढ़े हो रहे हैं तब तक दुनिया की कोई भी योग विद्या या चिकित्सा आपको जवान नहीं बना सकती इसे प्लासीबो इफेक्ट कहा जाता है आपकी कोशिकाएं हर पल आपकी सोच को सुन रही हैं और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया दे रही हैं जब आप कुंभक का अभ्यास करते हैं तो आपकी चेतना वर्तमान क्षण में केंद्रित हो जाती है जहां ना तो भूतकाल का कोई अफसोस है और ना ही भविष्य की कोई चिंता यह वर्तमान का क्षण ही वह अमृत है जिसकी तलाश में योगी हिमालय की गुफाओं में जाते हैं जब आप रोज इस शून्यता का अनुभव करते हैं तो आपका अवचेतन मन खुद को रिप्रोग्राम करने लगता है और वह शरीर को बुढ़ापे की ओर ले जाने वाली उस पुरानी मनोवैज्ञानिक घड़ी को तोड़ देता है यही वह अवस्था है जहां 60 साल का व्यक्ति भी 25 साल के युवा जैसी ऊर्जा और मानसिक स्पष्टता को प्राप्त कर सकता है इस पूरी प्रक्रिया को एक बहुत ही यथार्थवादी और व्यावहारिक नजरिए से देखना जरूरी है क्या केवल कुंभक करने से कोई रातोंरात जवान हो जाएगा और अमर हो जाएगा नहीं यह कोई तिलिस्म नहीं है कुंभक आपके शरीर के भीतर उस वातावरण को तैयार करता है जहां एजिंग बेहद धीमी हो जाती है और शरीर की रिपेयरिंग अत्यंत तेज हो जाती है लेकिन इसके साथ आपको अपना आहार अपनी दिनचर्या और अपने विचारों को भी उसी दिशा में मोड़ना होगा जब आप सही कुंभक के साथ सही आहार और सकारात्मक सोच को मिला देते हैं तब जो रसायन आपके शरीर में बनती है वह किसी भी बाहरी दवा या सर्जरी से कहीं अधिक शक्तिशाली होती है यह एक निरंतर चलने वाली साधना है जो ना केवल आपके बाहरी रूप को निखारती है बल्कि आपको भीतर से एक ऐसा शांत स्थिर और शक्तिशाली इंसान बना देती है जिसे समय की कोई भी मार प्रभावित नहीं कर सकती तो आज से अपनी सांसों के इस अद्भुत विज्ञान को केवल एक क्रिया ना समझें बल्कि इसे अपने अस्तित्व से जुड़ने का एक पुल माने इस रहस्य को जानने के बाद अब आपके पास यह चुनाव है कि आप अपनी सांसों को यूं ही अनियंत्रित और तेज चलने देंगे या फिर उन्हें कुंभक की शक्ति से थाम कर अपने जीवन अपने स्वास्थ्य और अपनी उम्र की डोर अपने हाथों में लेंगे यह विद्या कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि वह परम सत्य है जिसे सदियों से छिपाया गया था और अब समय आ गया है कि हम इसे पूरी वैज्ञानिक समझ और श्रद्धा के साथ अपने जीवन में उतारें अगर इस वीडियो ने आपकी सोच में एक नया आयाम जोड़ा है और आपको यह ज्ञान तार्किक व सत्य लगा है तो इस अद्भुत जानकारी को अपने परिवार और दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और हां कमेंट बॉक्स में मुझे लिखकर बताएं कि क्या आप कल सुबह से अपनी दिनचर्या में इस सहज कुंभक अभ्यास को शामिल करने जा रहे हैं या नहीं चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें क्योंकि हम आगे भी आपके लिए ऐसे ही गहरे वैज्ञानिक और रहस्यमई सत्य लाते रहेंगे जो आपके जीवन को पूरी तरह बदल सकते हैं जुड़े रहें स्वस्थ रहें और अपनी ऊर्जा को जगाए रखें

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