हरिमंदिर साहिब की पवित्रता हेतु मोबाइल पर पूर्ण प्रतिबंध जरूरी – आनंदमूर्ति गुरु माँ का आध्यात्मिक संदेश
हरिमंदिर साहिब की पवित्रता हेतु मोबाइल पर पूर्ण प्रतिबंध जरूरी – आनंदमूर्ति गुरु माँ का आध्यात्मिक संदेश
बटाला : अविनाश शर्मा /
दिव्य भक्ति रस और आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत वातावरण में अमृतसर स्थित चिन्मय मंदिर हॉल में सत्संग का भव्य आयोजन किया गया, जहां पूजनीय आनंदमूर्ति गुरु माँ जी की पावन उपस्थिति ने श्रद्धालुओं के हृदयों को भक्ति रंग में सराबोर कर दिया। इस पवित्र समागम में बटाला ,गुरदासपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों से आई संगत ने बड़ी श्रद्धा और प्रेम भाव से उपस्थित होकर गुरु महाराज जी के दर्शन किए और आत्मिक आनंद की अनुभूति प्राप्त की।
इस संबंध में जानकारी देते हुए गुरु माँ जी के शिष्य शर्मा और नंदा ने बताया कि यह सत्संग विशेष रूप से साधकों को गुरु चरणों से जोड़ने और नाम सिमरन की प्रेरणा देने हेतु आयोजित किया गया था।
अपने अमृतमय प्रवचन में आनंदमूर्ति गुरु माँ जी ने कहा कि जब भी सतगुरु की कृपा से अवसर मिलता है, वे सबसे पहले श्री हरिमंदिर साहिब में मत्था टेककर गुरबाणी की मधुर ध्वनि में लीन होकर आत्मिक शांति प्राप्त करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु भक्ति में डूबना ही मानव जीवन की सच्ची सफलता है।
गुरु माँ जी ने भावुक अपील करते हुए कहा कि श्री हरिमंदिर साहिब की पवित्र मर्यादा को बनाए रखने के लिए मोबाइल फोन पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में हेड ग्रंथी को लिखित अनुरोध किया जाएगा ताकि श्रद्धालु सेल्फी और वीडियो बनाने में समय व्यर्थ न गंवाएं, बल्कि गुरु राम दास जी के चरणों में बैठकर नाम सिमरन का लाभ लें।
उन्होंने अन्य धार्मिक स्थलों पर लागू मोबाइल प्रतिबंधों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे नियम श्रद्धालुओं को एकाग्रचित्त होकर प्रभु भक्ति में लीन होने में सहायक होते हैं।
अपने प्रेरणादायक संदेश में गुरु माँ जी ने कहा कि मानव जीवन ईश्वर भक्ति के लिए मिला अनमोल अवसर है। प्रत्येक व्यक्ति को प्रातःकाल उठकर भजन-कीर्तन करना चाहिए तथा अपने बच्चों को भी धार्मिक संस्कारों से जोड़ना चाहिए।
अंत में उन्होंने संदेश दिया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए ईमानदारी और मेहनत का मार्ग अपनाना चाहिए तथा गलत कार्यों से दूर रहना चाहिए। सच्चे मार्ग पर चलकर ही जीवन को सफल और धन्य बनाया जा सकता है।
इस अवसर पर पूरा वातावरण राम नाम और गुरबाणी की मधुर वाणी से गूंज उठा, जिससे श्रद्धालुओं ने गहन आत्मिक शांति और दिव्य आनंद का अनुभव किया।

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