कलयुगी मामा बना 'कंस' लखनऊ के गुरुकुल में मासूम 10 वर्षीय भांजे की पीट-पीटकर हत्या
कलयुगी मामा बना 'कंस' लखनऊ के गुरुकुल में मासूम 10 वर्षीय भांजे की पीट-पीटकर हत्या
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आलमनगर स्थित एक गुरुकुल से रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ 'रामानुज भागवत वेद विद्यापीठ' के संचालक सौरभ मिश्रा उर्फ कन्हैया ने अपने ही सगे रिश्ते के भांजे, 10 वर्षीय दिव्यांश की बेरहमी से पिटाई कर जान ले ली। जिस मासूम को परिजनों ने बेहतर भविष्य और संस्कारों के लिए मामा के पास भेजा था, वही मामा उसके लिए काल बन गया।
पूरी रात चली बर्बरता, दीवार से टकराने पर हुआ बेहोश
पुलिस जांच में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी सौरभ ने अनुशासन के नाम पर मासूम दिव्यांश को घंटों धूप में खड़ा रखा। इसके बाद पूरी रात उसे थप्पड़ों, लात-घूंसों और डंडों से पीटा गया।
निर्दयता की हद: आरोपी ने बच्चे को इतनी जोर से लात मारी कि वह दीवार से जा टकराया और बेहोश हो गया।
लापरवाही: बच्चा तड़पता रहा, लेकिन आरोपी उसे उसी हाल में छोड़कर चला गया। अगले दिन बुधवार सुबह जब उसने देखा, तो दिव्यांश की मौत हो चुकी थी।
साजिश में प्रेमिका भी शामिल, CCTV फुटेज गायब
घटना को छिपाने के लिए आरोपी ने गहरी साजिश रची। पुलिस के अनुसार, आरोपी की महिला मित्र प्रियंका ने साक्ष्यों को मिटाने और गुरुकुल के CCTV फुटेज को हटाने में मदद की। पुलिस ने प्रियंका को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कुकर्म की आशंका
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्चे के शरीर पर भारी वस्तु से प्रहार और गंभीर अंदरूनी चोटों की पुष्टि हुई है। पीड़ित माता-पिता ने बच्चे के साथ कुकर्म (Unnatural Sex) की भी आशंका जताई है, जिसके बाद पुलिस ने सैंपल लेकर लैब जांच के लिए भेज दिए हैं।
"हमने अपने इकलौते बेटे को बेहतर भविष्य के लिए भेजा था, हमें क्या पता था कि उसका सगा मामा ही 'कंस' निकल जाएगा।"
— नरेंद्र कुमार (मृतक के पिता)
आरोपी की दलील और पुलिसिया कार्रवाई
आरोपी सौरभ ने पुलिस को बताया कि दिव्यांश नियमों का पालन नहीं करता था और उसकी वजह से दूसरे बच्चे भी बिगड़ रहे थे। हालांकि, पुलिस ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
वर्तमान स्थिति:
मुख्य आरोपी सौरभ मिश्रा गिरफ्तार।
महिला मित्र प्रियंका हिरासत में।
गुरुकुल को सील करने और अन्य कानूनी पहलुओं की गहन जांच जारी है।
यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि शिक्षा और संस्कारों के नाम पर चल रहे संस्थानों की निगरानी कितनी अनिवार्य है।

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