कृषि विश्वविद्यालय भूमि मामला: सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार को झटका, भाजपा ने बताया जनता की जीत

कृषि विश्वविद्यालय भूमि मामला: सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार को झटका, भाजपा ने बताया जनता की जीत


पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय भूमि अधिग्रहण मामलाः सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार की करारी हार, भाजपा ने इसे जनता और संस्थान की जीत बताया - त्रिलोक कपूर

पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय भूमि में टूरिज्म विलेज बना कर पालमपुर के खिलाफ साजिश में आज सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश सरकार की सुख्खू सरकार की करारी हार पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने इसे पालमपुर की जनता, कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त जीत करार दिया है। 


कपूर ने कहा पालमपुर स्थित चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय की भूमि अधिग्रहण मामले में उच्चतम न्यायालय ने प्रदेश सरकार के मुँह पर करारा तमाचा जड़ा है । 


भाजपा नेता ने कहा की माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें राज्य सरकार ने 'टूरिज्म विलेज' के नाम पर विश्वविद्यालय की बेशकीमती भूमि को अधिग्रहित करने का प्रयास किया था।


कपूर ने कहा कि इस विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय की भूमि को पर्यटन परियोजनाओं के लिए हस्तांतरित करने का निर्णय लिया था। सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय प्राध्यापक संघ (HPAUTA) के अध्यक्ष प्रोफेसर जनार्दन सिंह और राकेश चहोता ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।


उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता 

को समझते हुए इस अधिग्रहण पर स्थगन आदेश (Stay Order) लगा दिया था, जिसे चुनौती देते हुए प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार की याचिका खारिज किए जाने से अब हाईकोर्ट का स्थगन आदेश प्रभावी रहेगा।


त्रिलोक कपूर ने कहा कि भाजपा ने इस जनविरोधी निर्णय के खिलाफ सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन किया था और आज न्यायपालिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार मनमाने तरीके से शिक्षण संस्थानों की भूमि का व्यावसायिक उपयोग नहीं कर सकती। 


कपूर ने कहा कि पालमपुर और हिमाचल प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए भाजपा हमेशा सजग है और राज्य की संपत्तियों को किसी भी सूरत में बिकने नहीं दिया जाएगा।


भाजपा नेता कपूर ने इस कानूनी हार को प्रदेश सरकार की प्रशासनिक विफलता बताते हुए मुख्यमंत्री से तुरंत त्यागपत्र देने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि सरकार का यह कदम न केवल विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हमला था, बल्कि जनहित के विरुद्ध एक सोची-समझी साजिश थी। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने विश्वविद्यालय की भूमि को सुरक्षित कर उसके अनुसंधान और शैक्षणिक कार्यों के भविष्य को सुनिश्चित कर दिया हहै।


इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में भी उबाल आ गया है और भाजपा इस मुद्दे को सरकार की नैतिक हार के रूप में देख रही है।

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