नेर चौक में आउटसोर्स कर्मचारियों का हुंकार: नौकरी सुरक्षा और समान वेतन की उठी मांग
नेर चौक में आउटसोर्स कर्मचारियों का हुंकार: नौकरी सुरक्षा और समान वेतन की उठी मांग
“10-12 हजार में कैसे चले घर?” नेर चौक में आउटसोर्स कर्मियों का फूटा गुस्सा
मंडी : अजय सूर्या /
जिला मंडी के नेर चौक में मंगलवार को आउटसोर्स यूनिट द्वारा एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारियों ने भाग लेकर अपनी प्रमुख मांगों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में मुख्य रूप से नौकरी की सुरक्षा और समान काम के लिए समान वेतन जैसे अहम मुद्दों को उठाया गया। कर्मचारियों ने अपनी समस्याएं रखते हुए बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में उनका जीवनयापन अत्यंत कठिन हो गया है।
हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी संघ के संयोजक अश्विनी शर्मा ने कहा कि 10 से 12 हजार रुपये के मासिक वेतन में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल है। इससे न तो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पा रही है और न ही स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताएं पूरी हो रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई कर्मचारी जोखिमपूर्ण कार्य करते हुए ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन उनके परिवारों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला।
सह संयोजक सोहनलाल तुलिया ने कहा कि लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद कर्मचारियों के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है और नौकरी जाने का भय बना रहता है। कई मामलों में वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को अचानक हटाया भी गया है।
नेर चौक यूनिट (स्वास्थ्य विभाग आउटसोर्स यूनियन) की अध्यक्ष चंपा ठाकुर ने बताया कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है और एरियर भी लंबित हैं, जबकि सरकार ने हर माह की 7 तारीख तक वेतन देने के निर्देश जारी किए हैं। उपाध्यक्ष विशाल चंदेल ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की आवाज उठाने पर कंपनियां दबाव बनाती हैं।
बैठक में जिला मंडी के सभी विभागों के आउटसोर्स कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का संकल्प लिया। कर्मचारियों ने बताया कि इससे पहले 27 मार्च 2026 को शिमला में भी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया था। अब आंदोलन को जिलावार स्तर पर मजबूत किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत मंडी से की गई है और आगे इसे पूरे प्रदेश में जारी रखा जाएगा।
अंत में कर्मचारियों ने सरकार से मांग की कि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए और ऐसी ठोस नीति बनाई जाए, जिससे उनकी नौकरी सुरक्षित हो तथा भविष्य को स्थायित्व मिल सके।

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