आईपीएल मैचों की सुरक्षा को लेकर चार माॅक ड्रिल होंगी आयोजित

 आईपीएल मैचों की सुरक्षा को लेकर चार माॅक ड्रिल होंगी आयोजित

आज आंशिक स्टैंड ध्वस्त होने की स्थिति पर हुआ सफल अभ्यास


धर्मशाला, आगामी मई माह के दौरान हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम धर्मशाला में होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग के तीन महत्वपूर्ण मुकाबलों के दृष्टिगत जिला प्रशासन कांगड़ा ने व्यापक आपदा प्रबंधन तैयारियां शुरू की हैं। इसी क्रम में विभिन्न संभावित आपदा परिस्थितियों से निपटने के लिए चार माॅक ड्रिल आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

ईओसी इंचार्ज रोबिन कुमार ने बताया कि आईपीएल जैसे हाई-प्रोफाइल आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में दर्शकों, खिलाड़ियों, मैच अधिकारियों, वीआईपी, वीवीआईपीं तथा सहयोगी स्टाफ की उपस्थिति को देखते हुए किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि संभावित आपदा परिदृष्यों के आधार पर चार माॅक ड्रिल आयोजित की जाएंगी। इनमें आज 28 अप्रैल को पार्शियल स्टैंड कोलैप्स ड्रिल (स्टेडियम के आंशिक ढांचे के गिरने का सिमुलेशन) की माॅक ड्रिल का आयोजन किया गया। इसके अलावा 29 अप्रैल को ड्रोन इंट्रूजन, एयरस्पेस थ्रेट ड्रिल, 5 मई को नाइट-टाइम इमरजेंसी ड्रिल (मैच के दौरान बिजली बाधित होने, बैकअप लाइटिंग व कम दृष्यता में निकासी) तथा 5 मई को ही अग्निशमन आपदा ड्रिल (फूड कोर्ट या इलेक्ट्रिकल रूम में आग लगने की स्थिति) की माॅक ड्रिल आयोजित की जाएंगी।

रोबिन कुमार ने बताया कि आज प्रथम माॅक ड्रिल पार्शियल स्टैंड कोलैप्स ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। इस अभ्यास में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, होमगार्ड, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, स्वयंसेवकों तथा शिक्षा विभाग सहित विभिन्न एजेंसियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

माॅक ड्रिल के दौरान बचाव एवं राहत कार्य, घायलों की त्वरित निकासी, प्राथमिक उपचार, एंबुलेंस समन्वय, भीड़ प्रबंधन तथा आपातकालीन संचार व्यवस्था का व्यापक परीक्षण किया गया। सभी विभागों ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए निर्धारित समय सीमा में प्रभावी प्रतिक्रिया दी, जिससे आपदा प्रबंधन की तत्परता एवं क्षमता का सफल प्रदर्शन हुआ।

उन्होंने कहा कि इन माॅक ड्रिलों का मुख्य उद्देश्य संभावित आपदा की स्थिति में त्वरित एवं समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना, उपलब्ध संसाधनों का मूल्यांकन करना तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। साथ ही, अभ्यासों के माध्यम से संभावित कमियों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर किया जाएगा, ताकि वास्तविक परिस्थितियों में जन-जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


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