सोमवती अमावस्या और मिथुन संक्रांति के महासंयोग पर 'मिनी हरिद्वार' में उमड़ा आस्था का सैलाब
सोमवती अमावस्या और मिथुन संक्रांति के महासंयोग पर 'मिनी हरिद्वार' में उमड़ा आस्था का सैलाब
ज्वाली : दीपक शर्मा /
आज सोमवार, 15 जून 2026 को आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से एक दुर्लभ और अत्यंत शुभ दिन है। आज सोमवती अमावस्या, आषाढ़ संक्रांति और सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश का त्रिवेणी संगम बन रहा है। इस विशेष अवसर पर जिला कांगड़ा के ज्वाली उपमंडल स्थित 'मिनी हरिद्वार' में तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। अपनी आस्था को सार्थक करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दराज के क्षेत्रों से यहाँ पहुँच रहे हैं।
भोर से ही शुरू हुआ आस्था का सिलसिला
ज्वाली स्थित मिनी हरिद्वार में आज सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। पवित्र नदियों में स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने अपनी पारंपरिक आस्था का निर्वहन किया। इस अवसर पर भक्तों ने पीपल के वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या पर पीपल की पूजा से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी के चलते श्रद्धालुओं ने पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा की, उस पर पीला धागा लपेटा और फल के साथ पीले वस्त्र अर्पित किए।
तो वहीं मिनी हरिद्वार स्थित शिव मंदिर प्रबंधन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। दूर-दराज से आ रहे श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में भंडारे का विशेष प्रबंध किया गया है, जहाँ भक्त प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।
स्नान, दान और तर्पण का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करने से पितरों को शांति मिलती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। पंडितों का मानना है कि आज के दिन किए गए दान और तर्पण अत्यंत फलदायी होते हैं। मिथुन संक्रांति और सर्वार्थसिद्धि योग के इस दुर्लभ महासंयोग के कारण, आज के दिन किए गए धार्मिक कार्यों का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

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