रति खड्ड का पानी हुआ जहरीला, बड़ी संख्या में मरीं मछलियां और जलीय जीव
रति खड्ड का पानी हुआ जहरीला, बड़ी संख्या में मरीं मछलियां और जलीय जीव
उद्योग विभाग, मत्स्य विभाग, जल शक्ति विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लिए पानी के नमूने
नेरचौक : अजय सूर्या /
बल्ह उपमंडल की रति खड्ड में जल प्रदूषण का गंभीर मामला सामने आया है। खड्ड के पानी में बड़ी संख्या में छोटी मछलियां तथा अन्य जलीय जीव मृत अवस्था में पाए गए हैं, जिससे क्षेत्र के लोगों में चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों के अनुसार खड्ड के पानी का रंग अचानक काला पड़ गया है और उसकी गुणवत्ता में भी बदलाव देखने को मिला है, जिसके बाद जलीय जीवों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी से दुर्गंध आने लगी है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में बीमारी फैलने की आशंका बढ़ गई है। प्रारंभिक तौर पर माना जा रहा है कि औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले दूषित पानी अथवा किसी सीवरेज लाइन के रिसाव के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई हो सकती है।
रति पंचायत के प्रधान श्याम लाल ने बताया कि हर वर्ष खड्ड के पानी के प्रदूषित होने से जलीय जीवों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि खड्ड के आसपास स्थित प्राकृतिक जल स्रोत भी खतरे की जद में हैं। इसके अलावा जल शक्ति विभाग की तीन उठाऊ पेयजल योजनाओं के स्रोत भी इसी क्षेत्र में हैं। यदि समय रहते मामले का समाधान नहीं किया गया तो आसपास के कई गांवों में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी प्रकार की घटना सामने आई थी, जिसमें औद्योगिक क्षेत्र से छोड़े गए गंदे पानी को प्रदूषण का प्रमुख कारण माना गया था। इस बार भी स्थानीय लोगों ने मामले की सूचना संबंधित विभागों को दे दी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उद्योग विभाग, मत्स्य विभाग, जल शक्ति विभाग तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और पानी के नमूने एकत्र कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही प्रदूषण के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा तथा दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रदूषण के स्रोत की शीघ्र पहचान कर प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि रति खड्ड के प्राकृतिक पर्यावरण, जल स्रोतों और जलीय जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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