कोटली कॉलेज को बंद करना क्षेत्र के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय : प्रो. अनुपमा सिंह
कोटली कॉलेज को बंद करना क्षेत्र के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय : प्रो. अनुपमा सिंह
मंडी : अजय सूर्या /
पूर्व प्रो-वाईस चांसलर एवं प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. अनुपमा सिंह ने कोटली कॉलेज को बंद किए जाने के निर्णय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक शिक्षण संस्थान का बंद होना नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों की आकांक्षाओं और सपनों को प्रभावित करने वाला कदम है।
प्रो. अनुपमा सिंह ने कहा कि ग्रामीण एवं दूरदराज़ क्षेत्रों के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं के लिए स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा संस्थानों की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है। कोटली कॉलेज ने वर्षों से क्षेत्र के युवाओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया है और इसके बंद होने से अनेक परिवारों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी हो जाएंगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज के विकास की आधारशिला होती है। यदि किसी संस्थान में संसाधनों अथवा विद्यार्थियों की संख्या से संबंधित समस्याएँ हैं, तो उनका समाधान खोजा जाना चाहिए, न कि शिक्षा के अवसरों को समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज का युवा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसरों की अपेक्षा रखता है तथा सरकार और समाज का दायित्व है कि उनकी इन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए सकारात्मक प्रयास किए जाएँ।
प्रो. अनुपमा सिंह ने प्रदेश सरकार, जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से कोटली कॉलेज के भविष्य को लेकर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए जिससे क्षेत्र के विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो और उन्हें अपने क्षेत्र में ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता रहे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा से जुड़े किसी भी निर्णय में विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय जनता की भावनाओं एवं आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने क्षेत्रवासियों से शिक्षा के संरक्षण तथा युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए एकजुट होकर रचनात्मक प्रयास करने का आह्वान किया।
प्रो. अनुपमा सिंह ने कहा कि शिक्षा संस्थानों का संरक्षण केवल वर्तमान पीढ़ी ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का भी माध्यम है।

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