सुधीर शर्मा ने विश्व पर्यावरण दिवस पर बच्चों को दिया पौधों की जिम्मेदारी निभाने का संदेश
सुधीर शर्मा ने विश्व पर्यावरण दिवस पर बच्चों को दिया पौधों की जिम्मेदारी निभाने का संदेश
धर्मशाला में शहरी और ग्रामीण भाजपा के शानदार कार्यक्रम, नवजीवन फाउंडेशन की रही खास भागीदारी, पौधे खरीदने और उनकी देखरेख के लिए बच्चों को 2500-2500 रुपये देने की घोषणा
धर्मशाला,
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र में दो अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया। दोनों कार्यक्रमों में विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता सुधीर शर्मा मुख्य रूप से शामिल हुए।
पहला कार्यक्रम गांधी वाटिका, धर्मशाला में शहरी भाजपा धर्मशाला द्वारा आयोजित किया गया। इस अवसर पर लायंस क्लब, रोटरी क्लब और जनचेतना संस्था ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में सैकड़ों बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस दौरान सुधीर शर्मा ने बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करते हुए घोषणा की कि प्रत्येक बच्चे को 2500-2500 रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन पैसों से बच्चे एक-एक पौधा खरीदेंगे और पूरे वर्ष उसकी देखभाल एवं संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि सतत चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें नई पीढ़ी की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।
वहीं दूसरा कार्यक्रम रक्कड़ में ग्रामीण भाजपा द्वारा आयोजित किया गया। इस आयोजन में नवजीवन फाउंडेशन, वन विभाग तथा अमेरिका स्थित नीम संस्था (NEEM Foundation USA) ने भागीदारी की। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर विशेष चर्चा की गई।
सुधीर शर्मा ने कहा कि पर्यावरण का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा। उन्होंने लोगों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि रासायनिक खेती के स्थान पर प्राकृतिक और पारंपरिक कृषि पद्धतियां समय की आवश्यकता हैं।
उन्होंने किसानों से मिलेट्स (श्री अन्न) की खेती को बढ़ावा देने का आग्रह किया और ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, कुटकी तथा सांवा जैसे विभिन्न मिलेट्स का उल्लेख करते हुए इनके स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय लाभों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मिलेट्स न केवल पोषण से भरपूर हैं, बल्कि कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।
दोनों कार्यक्रमों में पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश देते हुए लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संकल्प दिलाया गया।

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