विशाल विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन, संविधान के मूल्यों पर हुआ व्यापक विमर्श
विशाल विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन, संविधान के मूल्यों पर हुआ व्यापक विमर्श
नूरपुर : विनय महाजन /
हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कांगड़ा द्वारा होटल धौलाधार हाइट्स, धर्मशाला में “विशाल विधिक साक्षरता शिविर” का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “मौलिक अधिकार और कर्तव्य – वर्तमान परिदृश्य” तथा “सशक्त, समर्थ एवं समरस समाज – संवैधानिक लक्ष्य” रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय विक्रम नाथ, न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय एवं कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण रहे।इस कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कांगड़ा चिराग भानु सिंह ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।माननीय विवेक सिंह ठाकुर ने विषय परिचय प्रस्तुत करते हुए संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों एवं नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता को समय की आवश्यकता बताया। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों द्वारा “मौलिक अधिकार और कर्तव्य – वर्तमान परिदृश्य” तथा “सशक्त, समर्थ एवं समरस लेक्ट संवैधानिक लक्ष्य” विषयों पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किए गए।
कुमारी दिव्यांगना त्रिवेदी (द्वितीय वर्ष, विधि छात्रा - मनिपाल यूनिवर्सिटी, जयपुर) "मौलिक अधिकार और कर्तव्य: वर्तमान परिदृश्य" विषय पर बेहद तार्किक और व्यावहारिक विचार व्यक्त किए। उन्होंने अधिकारों के साथ-साथ नागरिक कर्तव्यों के संतुलन को देश के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में हाल ही में घोषित 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों में पूरे हिमाचल प्रदेश में तीसरा (3rd) स्थान हासिल djus okyh कांगड़ा की बेटी कुमारी शाम्या बरजाट्या ने "सशक्त, समर्थ एवं समरस समाज – संवैधानिक लक्ष्य" विषय पर अपना ओजस्वी वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने एक ऐसे समरस और सशक्त समाज की रूपरेखा सामने रखी जो भारतीय संविधान के मूल आदर्शों को पूरा करता हो।
माननीय मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया अपने संबोधन में समाज में न्याय की सुलभता और कानूनी साक्षरता के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने न्याय और जनसेवा की नई राह दिखाते हुए उपस्थित सभी कानूनी पेशेवरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों को समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रेरित किया।
अपने संबोधन में माननीय कोटीश्वर सिंह एवं माननीय संजय करोल ने संविधान की मूल भावना, न्याय तक समान पहुंच तथा नागरिकों की सामाजिक एवं नैतिक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विधिक साक्षरता को लोकतंत्र की मजबूती का आधार बताया। लीगल सर्विस अथॉरिटी के प्रावधानों को पूरी तरह से जागरूक करने के उन्होंने उदाहरण दिऐ l उन्होंने कहा कि इसका मकसद यह है हर आदमी को न्याय मिले कोई भी न्याय से वंचित ना रहे पैरा लीगल वॉलिंटियरों की उन्होंने खुलकर प्रशंसा की l
मुख्य अतिथि माननीय विक्रम नाथ ने अपने संबोधन में विधिक जागरूकता अभियानों की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना विधिक सेवा संस्थाओं का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने नागरिकों से संविधान में निहित मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में मौजूद सभी पैरा लीगल वैलेंटरो की भूमिका पर मुख्य अतिथि ने उनके कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह ज्यूडिशरी की बॉडी हैlइन्हीं लोगों के माध्यम से हम कानून को घर द्वार पर पहुंचने में सफल हुए हैं और कानून को जागरूक करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका हैl उनके योगदान से हम भारत के हर नागरिक को न्याय दिलवाने में सफल हो सकते हैंl
कार्यक्रम के दौरान आपदा प्रभावित परिवारों को राहत राशि भी वितरित की गई तथा विधिक जागरूकता से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया। अंत में माननीय संदीप शर्मा, न्यायाधीश, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति द्वारा सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान “जन गण मन” के साथ हुआ। संदीप शर्मा ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विभाग के सभी सदस्यों व अधिकारियों का आभार जताया कि जिनके सौजन्य से यह कार्यक्रम संपूर्ण हुआ है l इस अवसर पर न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, शिक्षाविदों, व पी एल वी व विद्यार्थियों तथा बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भाग लिया।

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