हिमाचल प्रदेश में भूकंप के झटके, कांगड़ा-चंबा क्षेत्र में महसूस की गई हलचल, कोई जान-माल का नुकसान नहीं
हिमाचल प्रदेश में भूकंप के झटके, कांगड़ा-चंबा क्षेत्र में महसूस की गई हलचल, कोई जान-माल का नुकसान नहीं
धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और चंबा जिलों में शुक्रवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। मौसम विज्ञान कार्यालय के अनुसार, भूकंप रात करीब 10 और 10 बज कर 30 मिन्ट के बीच
भूकंप का विवरण
केंद्र: भूकंप का केंद्र कांगड़ा के धर गोदोई के पास, कांगड़ा-चंबा सीमा पर स्थित था। यह धर्मशाला से लगभग 40 किलोमीटर दूर था।
गहराई: यह हलचल सतह से पांच किलोमीटर की गहराई पर दर्ज की गई।
प्रभावित क्षेत्र: भूकंप के झटके न केवल हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला और आसपास के इलाकों में महसूस किए गए, बल्कि चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों तक भी इसकी गूंज सुनाई दी।
सुरक्षा स्थिति
अधिकारियों ने बताया कि भूकंप के झटके महसूस होते ही धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों में दहशत फैल गई और लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। राहत की बात यह है कि राज्य के किसी भी हिस्से से अब तक किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
भूकंपीय संवेदनशीलता
विशेषज्ञों के अनुसार, कांगड़ा और चंबा जिले 'भूकंपीय क्षेत्र-5' (Seismic Zone V) के अंतर्गत आते हैं। यह क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है और यहाँ उच्च क्षति का जोखिम बना रहता है।
भूकंप क्यों आता है? (वैज्ञानिक पृष्ठभूमि)
पृथ्वी की ऊपरी सतह यानी 'क्रस्ट' कई विशाल और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है, जो निरंतर गतिशील रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे से दूर जाती हैं या रगड़ खाती हैं, तो उनके किनारों पर भारी दबाव और घर्षण पैदा होता है।
जब यह दबाव प्लेटों की सहनशक्ति की सीमा को पार कर जाता है, तो चट्टानें अचानक टूट जाती हैं या अपनी जगह से फिसल जाती हैं। इस अचानक हुई हलचल से भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है, जो तरंगों के रूप में चारों ओर फैलती है। इसी ऊर्जा के धरातल तक पहुँचने से पृथ्वी की सतह हिलने लगती है, जिसे हम भूकंप कहते हैं।

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