आजादी के बाद भी 'काले पानी' की जिंदगी जीने को मजबूर थे मनारा वार्ड-2 के लोग, समाजसेवी विपन शर्मा ने राह की आसान
आजादी के बाद भी 'काले पानी' की जिंदगी जीने को मजबूर थे मनारा वार्ड-2 के लोग, समाजसेवी विपन शर्मा ने राह की आसान
ज्वाली : दीपक शर्मा /
ज्वाली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली मनारा पंचायत के वार्ड नंबर 2 के ग्रामीणों को देश की आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। कई सरकारें आईं और गईं, नेताओं ने चुनाव जीतने के लिए कई बार बड़े-बड़े वायदे भी किए, लेकिन वे वादे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए। इस वार्ड की स्थिति ऐसी थी कि आज तक यहाँ के लोगों के लिए कोई रास्ता ही नहीं बन पाया, जिसके कारण यहाँ के बाशिंदे 'काले पानी' जैसी नारकीय जिंदगी जीने को मजबूर थे। इस वार्ड के करीब 5-6 घरों के स्थानीय निवासी दलेर सिंह, जन्म सिंह, सेवा देवी, जवाहर लाल, लीला देवी, सरोज कुमारी, सन्नी दियोल, संजय कुमार, शमशेर सिंह, मंजू बाला, नरेन्द्र कुमार, जोगिन्दर कुमार, सुनीता देवी और रजनी बाला ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि आज तक किसी भी सरकार या जनप्रतिनिधि ने उनकी इस गंभीर समस्या पर कोई गौर नहीं किया। आलम यह था कि यदि गांव में कोई व्यक्ति बीमार हो जाता, तो उसे चारपाई पर लिटाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता था।
लेकिन, इस संकट के बीच हरसर निवासी समाजसेवी पंडित विपन शर्मा ग्रामीणों के लिए मसीहा बनकर सामने आए। दरअसल, चुनावों से कुछ दिन पहले विपन शर्मा कांगू माता मन्दिर में माथा टेकने आए थे, जहाँ स्थानीय लोगों ने उनसे मुलाकात कर इस रास्ते की बदहाली और अपनी सालों पुरानी पीड़ा को उनके सामने रखा। विपन शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत संज्ञान लिया और बिना किसी देरी के खुद जेसीबी मशीन लगवाकर इस दुर्गम रास्ते को चलने लायक बना दिया। रास्ता साफ होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। इस सराहनीय कार्य के लिए सभी स्थानीय निवासियों ने समाजसेवी पंडित विपन शर्मा का आभार व्यक्त किया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर विपन शर्मा जैसे संवेदनशील और जनहित की सोच रखने वाले लोग राजनीति में आते हैं, तो गांवों के विकास में उनकी बेहद अहम और सकारात्मक भूमिका होगी।

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