श्री हरि कथा आत्मोत्थान का दिव्य उद्घोष है:- स्वामी विज्ञानानंद जी
श्री हरि कथा आत्मोत्थान का दिव्य उद्घोष है:- स्वामी विज्ञानानंद जी
नूरपुर : विनय महाजन /
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से ग्राम क्योड़ घारियां के वंडर लैंड पब्लिक स्कूल में तीन दिवसीय श्री हरि कथा का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण के मध्य संपन्न हुआ। आज कथा के प्रथम दिवस के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर श्रीहरि कथा का श्रवण किया तथा आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम में दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य कथा व्यास स्वामी विज्ञानानंद जी ने श्री हरि कथामृत के महात्म्य का भावपूर्ण वर्णन करते हुए मानव जीवन में भक्ति एवं अध्यात्म के महत्व पर प्रकाश डाला।
स्वामी विज्ञानानंद जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि श्री हरि कथा आत्मोत्थान का दिव्य उद्घोष है यह मात्र धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य माध्यम है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागते हुए मानसिक तनाव, अशांति और निराशा का शिकार हो रहा है। ऐसे समय में भगवान के नाम का स्मरण, सत्संग एवं श्रीहरि कथा मानव जीवन को नई दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि जब व्यक्ति सच्चे गुरु के मार्गदर्शन में ईश्वर की भक्ति करता है, तब उसके भीतर सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं और जीवन में प्रेम, करुणा, सद्भाव एवं नैतिक मूल्यों का विकास होता है।उन्होंने युवाओं को भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने का संदेश देते हुए कहा कि अध्यात्म ही जीवन को सफल एवं सार्थक बनाता है। कथा के दौरान भजन-कीर्तन एवं संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु भगवान के जयकारों एवं भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिए।
कार्यक्रम में महात्मा अश्वनी व मनप्रीत ने भजनों का गायन कर उपस्थित प्रभु भक्तों को नाचने पर मजबूर कर दिया। संस्थान की ओर से मानव कल्याण एवं विश्व शांति के लिए प्रार्थना की गई। श्री हरि कथा ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, प्रेम एवं आध्यात्मिक चेतना का संचार किया।

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