बरोट-खास का सर्वधर्म स्थल बना भाईचारे, आस्था और एकता की अनूठी मिसाल
बरोट-खास का सर्वधर्म स्थल बना भाईचारे, आस्था और एकता की अनूठी मिसाल
ज्वाली : राजेश कतनौरिया /
विकास खंड फतेहपुर की ग्राम पंचायत बरोट-खास के गांव बटलाहड़, वार्ड नंबर-7 में स्थानीय लोगों और गांववासियों के सहयोग से निर्मित सर्वधर्म स्थल आज पूरे क्षेत्र में आस्था, भाईचारे और सामाजिक एकता की मिसाल बन चुका है। इस धार्मिक स्थल की सुंदरता और यहां का शांत वातावरण हर आने वाले व्यक्ति के मन को खुशी और श्रद्धा से भर देता है।
स्थानीय ग्रामीणों देस राज, रघुवीर सिंह, नरेश कुमार, सिकंदर सिंह, नवीन कुमार, हरनाम सिंह और बलवंत सिंह ने बताया कि जिस स्थान पर आज यह भव्य सर्वधर्म स्थल बना हुआ है, वहां पहले घना जंगल हुआ करता था। गांववासी उस स्थान पर जाने से भी डरते थे। बाद में गांव के कुछ लोगों ने आपसी सलाह-मशवरा कर वहां मंदिर निर्माण का निर्णय लिया।
इसके बाद वर्ष 1997 में देस राज की अगुवाई में सबसे पहले पंजपीरी मंदिर का निर्माण शुरू किया गया। धीरे-धीरे गांववासियों और युवाओं के सहयोग से यहां शिव मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, जय पीर बाबा मंदिर और शनि देव मंदिर का निर्माण करवाया गया। वहीं रसोईघर का निर्माण प्रवीण सिंह ने अपनी माता स्वर्गीय शंकुतला देवी की स्मृति में करवाया, जो लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब 26 वर्षों की मेहनत, सेवा और सहयोग से इस स्थान को एक भव्य सर्वधर्म स्थल का रूप दिया गया है। यहां हर धर्म और वर्ग के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं। इस धार्मिक स्थल की सुंदरता और गांववासियों की एकजुटता क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि यहां हर वर्ष 10 मार्च को पारंपरिक छिंज मेले का आयोजन किया जाता है। खास बात यह है कि मेले के लिए गांववासियों से किसी प्रकार का चंदा या पैसे इकट्ठे नहीं किए जाते। लगभग 25 वर्षों से लोग अपनी श्रद्धानुसार स्वेच्छा से सहयोग राशि एक व्यक्ति के पास जमा करवाते हैं, जिससे मेले का आयोजन सफलतापूर्वक किया जाता है।
गांव की एक और विशेषता लोगों को आकर्षित करती है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में कोई भी व्यक्ति नशे का आदी नहीं है, जो समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश माना जा रहा है। बरोट-खास का यह सर्वधर्म स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना है, बल्कि सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और संस्कारों की भी अनूठी पहचान बन चुका है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें