भलाड़ के वनों में गूँजी कविताओं की गूँज: धौलाधार साहित्य कला मंच ने सजाई साहित्यिक महफिल
भलाड़ के वनों में गूँजी कविताओं की गूँज: धौलाधार साहित्य कला मंच ने सजाई साहित्यिक महफिल
ज्वाली, हिमाचल प्रदेश
ज्वाली तहसील के अंतर्गत भलाड़ के सुरम्य वन क्षेत्र में 'धौलाधार साहित्य कला मंच' के बैनर तले एक भव्य साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रकृति की गोद में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रबुद्ध साहित्यकारों, कवियों और कलाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सृजनात्मक संवाद स्थापित किया।
मुख्य आकर्षण और प्रस्तुतियाँ
गोष्ठी में साहित्य की विभिन्न विधाओं का संगम देखने को मिला। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में शामिल रहे:
सुरेश श्रेयस: इनकी पहाड़ी गजल 'टपरू' ने स्थानीय संस्कृति की सोंधी महक बिखेरी।
रमेश मस्ताना: मस्ताना जी की रचना 'घड़ोंतें' ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
पंकज दर्शी: इनकी गजल 'तू ही तू है' ने आध्यात्मिक और दार्शनिक रंग जमाया।
विजय उपाध्याय: वरिष्ठ कहानीकार उपाध्याय ने अपनी कहानी 'पोस्टकार्ड' के माध्यम से पुरानी यादों और संवेदनाओं को जीवंत किया।
सलीम आजम (एसडीएम): प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच उनकी हिंदी कविता ने उनकी संवेदनशील रचनात्मकता का परिचय दिया।
राम सिंह: इनके द्वारा गाए गए पंजाबी टप्पों ने माहौल को संगीतमय और ऊर्जावान बना दिया।
प्रमुख उपस्थिति
इस बौद्धिक चर्चा में डॉ. अशोक सोमल, कर्नल सुदेश सिंह, पूर्ण सिंह, तारा सिंह पठानिया और सेवानिवृत प्रधानाचार्य हरवंत सिंह ने भी भाग लिया। सभी वक्ताओं ने साहित्य की वर्तमान दशा और दिशा पर अपने विचार साझा किए।
अगली कड़ी: > गोष्ठी के अंत में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि अगली साहित्यिक परिचर्चा 'राजा का तालाब' स्थित कोटे वाली माता मंदिर परिसर में आयोजित की जाएगी। इस आगामी कार्यक्रम की मेजबानी का जिम्मा साहित्यकार पंकज दर्शी को सौंपा गया है।

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