हिम केयर के नाम पर अफ़वाह फैलाने के लिए सदन ही नहीं पूरे प्रदेश से माफ़ी मांगे मुख्यमंत्री : जयराम ठाकुर

 हिम केयर के नाम पर अफ़वाह फैलाने के लिए सदन ही नहीं पूरे प्रदेश से माफ़ी मांगे मुख्यमंत्री : जयराम ठाकुर

हिम केयर के पहले दिन से आज तक पूरी जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज से करवाए सरकार


शिमला : गायत्री गर्ग /

झूठ बोलकर हिम केयर जैसी योजना को बदनाम करने के लिए प्रदेश के लोग माफ़ नहीं करेंगे

हमारी सरकार में प्रति मरीज औसतन 11 हज़ार और सुक्खू सरकार में 14 हज़ार खर्च हुए

 सदन में मुख्यमंत्री द्वारा हिम केयर को लेकर दिए गए बयान के बाद भाजपा विधायक दल ने सदन में जमकर विरोध किया। मीडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार ने झूठ बोलने की सारी मर्यादाएं तोड़ दी हैं। जब पकड़े जाते हैं तो वह माफी मांग लेते हैं। आज भी सदन में मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने हिम केयर के में घोटाले की बात गलत बोली और उनके बयान सदन से हटाए जाएँ। इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है कि अपने झूठ पकड़े जाने के बाद मुख्यमंत्री सदन में कहें कि हमारा बयान हटाया जाए, हमने ग़लत बोला। मुख्यमंत्री को सदन में ही नहीं प्रदेश के लोगों से भी इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। जिस पवित्र भावना के साथ हमने हिम केयर की शुरुआत की थी और लाखों की संख्या में लोगों को नि:शुल्क इलाज इससे मिला था। वह बहुत सुकून देने वाली बात थी। उन्होंने कहा कि हिम केयर की योजना को देखते हुए प्रधानमंत्री ने देश भर के मुख्यमंत्रियों के सामने इसकी प्रसेंटेशन करवाई थी और इस तरह के मॉडल को आगे बढ़ाने की दशा में कार्य करने का निर्देश दिया था। इतनी कारगर योजना की राजनीतिक विद्वेष की भावना के साथ बदनाम करने के लिए प्रदेश के लोग सीएम को कभी माफ नहीं करेंगे। 

जयराम ठाकुर ने कहा कि हमारी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में कोरोना के बाद भी 3.98 लाख लोगों का इलाज हुआ जिस पर 442 करोड़ रुपए खर्च हुए। आयुष्मान के लाखों लोगों का अलग से भी इलाज हुआ। ऐसे में हैरानी की बात यह है कि जिस योजना पर भुगतान ही हमारी सरकार में 442 करोड़ रुपए हुआ, उसमें 1100 करोड़ रुपए का घोटाला कैसे हुआ। मुख्यमंत्री क्या कहते हैं, क्या करते हैं। यह उन्हें भी नहीं पता चलता है। अपने पद की गरिमा का भी उन्हें ध्यान नहीं है। जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार में जितने मरीजों का इलाज हिम केयर के तहत हुआ उसका औसत खर्च 14 हज़ार रुपए है, जबकि हमारी सरकार के समय में प्रति मरीज इलाज का औसत खर्च 11 हज़ार रुपए है। अर्थात पूर्व सरकार के मुक़ाबले व्यवस्था परिवर्तन की सरकार में यह सवा गुना अधिक है। यह खर्च क्यों बढ़ रहा है? क्योंकि मुख्यमंत्री ने दवाइयों की सप्लाई का ठेका अपने दो खास लोगों को दे रखा है। वह सरकारी कांट्रैक्ट रेट के बजाय सिविल सप्लाई के ज़रिए प्रदेश को सैकड़ों करोड़ की चपत लग रही है। यह चपत इन्हीं लोगों की जेब में जा रही है।

जयराम ठाकुर ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार द्वारा मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन का गठन किए दो साल से ज़्यादा का समय हो गया लेकिन उस कारपोरेशन के ज़रिए स्टेट कांट्रैक्ट रेट पर ख़रीदारी क्यों नहीं की गई? इससे किसे लाभ पहुंचाया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 26 फरवरी 2026 को वित्त सचिव की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक में यह अनुमान लगाया गया कि इस वर्ष में हिम केयर की वजह से 150 से 200 करोड़ का खर्च होगा। जबकि पहले से ही इस सरकार द्वारा हर वर्ष 334 करोड़ कैसे खर्च हो रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उन्होंने विधान सभा के अध्यक्ष के सामने सदन में यह मांग रखी है कि हिम केयर के मामले में पूरे मामले की जांच विजिलेंस की बजाय सरकार उच्च न्यायालय के सेवारत न्यायाधीश से करवाएं और सारे आंकड़े प्रदेश के सामने रखें। हिम केयर के शुरू होने से आज तक के मामले की जांच की जाए। सिर्फ एक सरकार के कार्यकाल की जाँच करवा कर वह हिम केयर के ख़िलाफ़ को नैरेटिव चलाना चाहते हैं, वह कामयाब नहीं होगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अब जिस राज पर चल पड़े हैं वह राह बहुत दूर नहीं जाती है।  


पेट्रोलियम पदार्थों पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाना स्वागत योग्य कदम, सुक्खू जी भी करें विचार

मध्य पूर्व में जारी युद्ध जैसी अस्थिर परिस्थितियों के बीच केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोलियम उत्पादों पर आयात शुल्क घटाने का निर्णय सराहनीय और दूरदर्शी है। डीजल और पेट्रोल में दस की कमी से आम जनता को महंगाई से राहत मिलेगी और अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलेगी। इसके विपरीत हिमाचल सरकार द्वारा डीजल पर सेस लगाकर कीमतें बढ़ाने की कोशिश करना दुर्भाग्यपूर्ण और जनविरोधी कदम है। यह निर्णय सीधे तौर पर किसानों, परिवहन क्षेत्र और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालता है। प्रदेश सरकार को तुरंत यह फैसला वापस लेकर जनता को राहत प्रदान करनी चाहिए।

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