हिमाचल के गद्दी समुदाय की बजट में अनदेखी पर गंभीर चिंता एवं सुप्रीम कोर्ट का आभार
विषय: हिमाचल के गद्दी समुदाय की बजट में अनदेखी पर गंभीर चिंता एवं सुप्रीम कोर्ट का आभार
हिमाचल प्रदेश के गद्दी समुदाय, जो सदियों से दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रहकर पशुपालन और ऊन उत्पादन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में संलग्न हैं, एक बार फिर प्रदेश सरकार के बजट में स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
जहां एक ओर सरकार द्वारा दालों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रदान किया गया है, वहीं दूसरी ओर गद्दी समुदाय की आजीविका का मुख्य आधार ऊन आज मात्र 30 रुपये प्रति किलोग्राम के दाम पर बिक रही है। यह अत्यंत चिंताजनक है कि इस महत्वपूर्ण उत्पाद के लिए अब तक किसी प्रकार का MSP निर्धारित नहीं किया गया है।
गद्दी समुदाय के लोग हिमाचल के सबसे दुर्गम और जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में रहकर अपनी आजीविका चलाते हैं। कठोर मौसम, सीमित संसाधनों और जीवन के निरंतर खतरों के बावजूद वे प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक धरोहर में अपना अमूल्य योगदान देते हैं।
प्रश्न यह उठता है कि आखिर कब तक प्रदेश सरकार इस मेहनतकश और समर्पित समुदाय को इसी प्रकार नजरअंदाज करती रहेगी? क्या गद्दी समुदाय की समस्याएं और की आजीविका सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं हैं?
हम प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि:
• ऊन पर शीघ्र MSP निर्धारित किया जाए।
• गद्दी समुदाय के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की जाए।
• दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ किया जाए।
गद्दी समुदाय की अनदेखी न केवल एक सामाजिक अन्याय है, बल्कि यह हिमाचल की परंपराओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ भी अन्याय है। अब समय आ गया है कि सरकार इस दिशा में ठोस और संवेदनशील कदम उठाए
:-साथ ही सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत एवं आभार
अनुसूचित जनजाति मोर्चा द्वारा सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय का हृदय से स्वागत एवं आभार व्यक्त किया जाता है।
मोर्चा का मानना है कि यह निर्णय सामाजिक न्याय एवं संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। निर्णय के अनुसार, यदि अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) वर्ग के व्यक्ति धर्म परिवर्तन करते हैं, तो उन्हें संविधान द्वारा प्रदत्त आरक्षण एवं अन्य विशेष सुविधाओं का लाभ नहीं मिलेगा।
यह निर्णय जनजातीय समाज के हितों की रक्षा करने वाला है, जिससे समाज को मजबूती मिलेगी और आरक्षण जैसी व्यवस्थाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक सुनिश्चित हो सकेगा।
अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मिलने वाली सुरक्षा का लाभ भी लागू नहीं होगा।
अनुसूचित जनजाति मोर्चा इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए माननीय न्यायपालिका का पुनः धन्यवाद करता है और आशा करता है कि यह फैसला समाज में समानता, न्याय और पारदर्शिता को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
जारीकर्ता: - सुनील नेगी
प्रदेश अध्यक्ष
भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा हि. प्र

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