अंबेडकर भवन सजाओपीपलू का जीर्णोद्धार ज़रूरी लेक़िन सार्वजिनक कार्यकर्मों के लिए ही हो इस्तेमाल-भूपेंद्र

 अंबेडकर भवन सजाओपीपलू का जीर्णोद्धार ज़रूरी लेक़िन सार्वजिनक कार्यकर्मों के लिए ही हो इस्तेमाल-भूपेंद्र


सरकाघाट : अजय सूर्या /

भवन के पास बने अंबेदकर की प्रतिमा और रसोईघर तथा शौचालय का भी हो निर्माण 

धर्मपुर विकास खण्ड के सजयाओपिपलु में बने अम्बेडकर भवन के इस्तेमाल व उसकी जगह कुछ और निर्माण करने बारे में कुछ दिनों से चल रही अटकलों के बारे में प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व ज़िला पार्षद भूपेंद्र सिंह ने खण्ड विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है और नवगठित ग्राम पंचायत प्रधान से मांग की है कि वे इसके लिए जल्दी ही बैठक बुलाये और स्थिति स्पष्ट करें।उन्होंने कहा कि अंबेडकर भवन का निर्माण एक विशेष योजना के तहत हुआ है और उसका मालिकाना हक ग्राम पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग का है। इसलिए इसका संचालन, रख रखाव, विस्तार,मुरम्मत इत्यादि करने की जिम्मेदारी भी ग्रामीण विकास विभाग और ग्राम पंचायत की है और उसकी सहमति से बिना इसका इस्तेमाल किसी अन्य कार्य के लिए नहीं हो सकता है और न ही कोई अन्य निर्माण हो सकता है।इसके बारे में कुछ दिनों से अफवाह फैली है कि यहां पर कोई इनडोर स्पोर्ट्स फील्ड बनाई जा रही है।ये सब उस समय हुआ है जब नवगठित पँचायतों ने अभी कार्यभार नहीं संभाला है और कथित तौर पर विधायक के कहने पर एक विभागीय कमेटी ने यहां इस भवन का निरीक्षण किया और निर्माण करने बारे प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी । लेक़िन उसकी जानकारी पँचायत को नहीं है और न ही किसी अन्य के पास है कि यहां पर क्या किया जाना है।भूपेंद्र सिंह ने कहा कि गत वर्षों में इस भवन के रखराव में बहुत कमियां हैं और इसकी मुरम्मत और इसे विकसित करने की सख़्त ज़रूरत है। यहाँ पर शौचालय न होने से यहां होने वाले कार्यक्रमों में भाग लेने वालों को भारी दिक्कतें पेश आती हैं हालांकि इसके साथ पिछली ओर दो साल से ख़ुदाई करके एक बड़ा गड्ढा बना हुआ है जिसमें गंदगी भरी रहती हैऔऱ सड़ांध पड़ी रहती है।इस भवन की खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं और बिजली की वायरिंग क्षतिग्रस्त हैं जिसकी मुरम्मत करने की ज़रूरत है। ये भवन इस क्षेत्र में एक मात्र ऐसा भवन है जहां तीन-चार सौ लोगों के बैठने की जगह है और यहां पर कई तरह से सरकारी, गैर सरकारी और सामाजिक कार्यक्रम होते हैं।इसलिये ये केवल एक पँचायत के लिए नहीं बल्कि दर्ज़न से ज़्यादा ग्राम पंचायतों के लिए सेंटर पड़ता है इसलिए इसका इस्तेमाल केवल सार्वजिक कार्यक्रमों के लिए ही होना चाहिए और ये भवन अंबेडकर के नाम पर एक विशेष योजना के तहत बना है तो इसके अंदर अंबेडकर जी की मूर्ति या तस्वीर भी लगनी चाहिए।भूपेंद्र सिंह ने सुझाव दिया है कि कियूंकि ये भवन काफ़ी समय पहले बना हुआ है और इसकी मुरम्मत करने की ज़रूरत है जिसके चलते इसकी छत, दीवारें,फ़र्श, रंगरोगन,बिजली, पंखे इत्यादि बदलने की ज़रूरत है और सबसे ज्यादा आवश्यकता इसके साथ शौचालय निर्माण की है और यहीं नहीं इसके पास जो ख़ाली ज़मीन है उसपर रसोईघर बनाने की भी जरूरत है ताकि बड़े बड़े कैम्पों, शिविरों, समारोहों और विवाह शादियों के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सके और उससे पँचायत को आय भी प्राप्त हो सके। उन्होंने ये सुझाव दिया किया कि यदि विभाग बजट उपलब्ध करवाए तो इसे दो या तीन मंजिला भी बनाया जा सकता है ताकि इसे अलग अलग कार्यकर्मों के लिए इस्तेमाल किया जा सके।इसलिए इसके बारे में ग्राम पंचायत की ओर से प्रस्ताव पारित करके विभाग को भेजा जाए और वर्तमान में जो अनिष्चितता और अटकलबाजी चल रही है उसके बारे में स्थिति साफ़ की जाए और इस भवन के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम न किया जाए।

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