राजकीय आर्य डिग्री कॉलेज, नूरपुर में एक दिन पूर्व मनाई गई गांधी जयंती
राजकीय आर्य डिग्री कॉलेज, नूरपुर में एक दिन पूर्व मनाई गई गांधी जयंती
नूरपुर : विनय महाजन /
प्रदेश मे 2 अक्टूबर, 2026 को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण राजकीय आर्य डिग्री कॉलेज, नूरपुर (कांगड़ा) के राजनीति विज्ञान विभाग ने आज गांधी जयंती एक दिन पूर्व, 1 अक्टूबर, 2026 को मनाई।इस अवसर पर विभाग ने "गांधी को पढ़ना: महात्मा गांधी की मूल रचनाओं पर प्रस्तुतियाँ" शीर्षक से एक शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें 133 छात्रों एवं शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संयोजन एवं समन्वय डॉ. रोहित कुमार, सहायक प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान ने किया। उन्होंने कार्यक्रम का परिचयात्मक तथा समापन भाषण भी दिया।
डॉ. रोहित कुमार के अनुसार, विभाग ने गांधी जयंती को उत्सव के बजाय अध्ययन के माध्यम से मनाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि गांधी को प्रत्येक वर्ष नारों और माल्यार्पण के माध्यम से सम्मानित किया जाता है, लेकिन इस वर्ष विभाग ने उन्हें उनके ही शब्दों के अध्ययन के माध्यम से सम्मानित करने का निश्चय किया। उन्होंने आगे बताया कि छात्रों को गांधीजी द्वारा रचित मूल स्रोतों को पढ़ने और उन पर चर्चा करने का कार्य सौंपा गया था, जिनमें उनकी आत्मकथा सत्य के प्रयोग, हिंद स्वराज और रचनात्मक कार्यक्रम जैसी पुस्तकें, तथा यंग इंडिया, नवजीवन और हरिजन जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख शामिल हैं। डॉ. कुमार ने कहा कि ये दस्तावेज़ बीसवीं सदी के सर्वाधिक महत्वपूर्ण राजनीतिक दस्तावेजों में से माने जाते हैं और सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, स्वराज तथा स्वदेशी जैसी अवधारणाओं को समझने का आधार प्रदान करते हैं।डॉ. कुमार के परिचयात्मक संबोधन के पश्चात् अनेक छात्रों ने गांधीजी की विभिन्न रचनाओं पर प्रस्तुतियाँ दीं: विजय ने हरिजन (पृष्ठ सात, 11 फरवरी, 1933) की सामग्री के आधार पर "व्हाई हरिजन" विषय पर प्रस्तुति दी। अंतिषा ने गांधीजी की आत्मकथा की सामग्री के आधार पर "माय एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ" विषय पर प्रस्तुति दी। ईशा ने हरिजन की सामग्री के आधार पर "व्हाई नॉट सिंपल हिंदूस" विषय पर चर्चा की। रितेश ने हरिजन की सामग्री के आधार पर "वी डू नॉट हेट" विषय पर प्रस्तुति दी। निधांशी ने 1941 में प्रकाशित पुस्तक की सामग्री के आधार पर "कंस्ट्रक्टिव प्रोग्राम: इट्स मीनिंग एंड प्लेस" विषय पर चर्चा की। विवेकिता ने "मेरा जीवन ही मेरा संदेश" विषय पर प्रस्तुति दी। प्रिशा ने यंग इंडिया, 29 सितंबर, 1921 की सामग्री के आधार पर "टैम्परिंग विद लॉयल्टी" विषय पर चर्चा की। अंकिता ने हरिजन की सामग्री के आधार पर "डॉ. अंबेडकर एंड कास्ट" विषय पर प्रस्तुति दी।
प्रस्तुतियों के समापन पर डॉ. रोहित कुमार ने कहा कि इन प्रस्तुतियों से यह सिद्ध होता है कि गांधीजी की रचनाएँ केवल ऐतिहासिक अवशेष नहीं हैं, बल्कि आज भी जीवंत तर्क प्रस्तुत करती हैं। डॉ. कुमार ने छात्रों के समक्ष तीन बातें रखीं: प्रथम, मूल रचनाओं को सारांशों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे पढ़ा जाना चाहिए; द्वितीय, गांधी को केवल एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक राजनीतिक विचारक के रूप में देखा जाना चाहिए; तृतीय, सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा, अहिंसक प्रतिरोध, विकेंद्रीकरण तथा सतत विकास पर उनके विचार आधुनिक भारत के लिए आज भी सीधे प्रासंगिक हैं। डॉ. कुमार ने सभी प्रस्तुतकर्ताओं को मूल स्रोत सामग्री के उपयोग के लिए बधाई दी तथा उन्हें कक्षा से बाहर भी गांधी साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम का समापन महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि तथा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकगण तथा छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। विभाग ने इस आयोजन को छात्रों में मूल स्रोत आधारित अध्ययन को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

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