देशभर में बढ़ी कुगती के देसी राजमाह की मांग, इस बार मौसम ने बढ़ाई किसानों की चिंता
देशभर में बढ़ी कुगती के देसी राजमाह की मांग, इस बार मौसम ने बढ़ाई किसानों की चिंता
स्वाद और गुणवत्ता के लिए मशहूर कुगती का राजमाह दिल्ली-पंजाब समेत कई राज्यों तक पहुंचता है
चंबा : जितेन्द्र खन्ना /
भरमौर विधानसभा क्षेत्र के तहत जिला चंबा के अंतिम गांव कुगती का देसी राजमाह अपने खास स्वाद और गुणवत्ता के कारण देशभर में पहचान बना चुका है। कुगती के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाया जाने वाला यह राजमाह दिल्ली, पंजाब और अन्य राज्यों तक पहुंचता है, जहां इसकी अच्छी मांग रहती है।
हालांकि राजमाह की खेती किसानों के लिए आसान नहीं है। बर्फीले और दुर्गम क्षेत्र में बीज बोने से लेकर फसल तैयार होने तक किसानों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। कुगती जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खेती का मौसम भी सीमित रहता है। यहां किसान मार्च-अप्रैल में राजमाह की बुवाई करते हैं, जबकि सितंबर-अक्टूबर में फसल तैयार होती है।
स्थानीय किसानों के अनुसार इस वर्ष अधिक बारिश के कारण राजमाह की फसल प्रभावित हुई है। लगातार नमी और मौसम में बदलाव के चलते उत्पादन में कमी आने की आशंका है। कई स्थानों पर फसल को नुकसान पहुंचने की बात भी सामने आई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। हालांकि किसानों को उम्मीद है कि मौसम के अंतिम चरण में परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो बेहतर उत्पादन मिल सकता है।
कुगती क्षेत्र के किसानों की आजीविका में राजमाह की खेती महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। समय के साथ क्षेत्र के खेती के पैटर्न में भी बदलाव आया है और राजमाह एक प्रमुख नकदी फसल के रूप में उभरकर सामने आया है। शोध अध्ययनों के अनुसार कुगती क्षेत्र में राजमाह की खेती का क्षेत्रफल बढ़ा है, क्योंकि किसानों को अन्य पारंपरिक फसलों की तुलना में इससे बेहतर आय मिलने की संभावना रहती है।
किसानों का कहना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा और सरकार की ओर से विपणन एवं परिवहन सुविधाओं को और मजबूत किया गया, तो कुगती का देसी राजमाह भविष्य में भी देशभर के बाजारों में अपनी विशेष पहचान बनाए रख सकता है।

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