सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग से सवाल: SIR प्रक्रिया से 43 लाख मतदाताओं का क्या होगा? फॉर्म-6 को लेकर मांगा जवाब
दी गई तस्वीरों (स्क्रीनशॉट) में दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। इसके आधार पर एक स्पष्ट और सटीक समाचार रिपोर्ट निम्नलिखित है:
सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग से सवाल: SIR प्रक्रिया से 43 लाख मतदाताओं का क्या होगा? फॉर्म-6 को लेकर मांगा जवाब
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कड़े सवाल पूछे हैं। अदालत ने लगभग 43 लाख मतदाताओं को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर किए जाने पर गहरी चिंता जताई है और चुनाव आयोग से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
मुख्य बातें:
43 लाख मतदाताओं पर संकट और कोर्ट की चिंता:
सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई है कि लगभग 43 लाख मतदाताओं को 'शिफ्टेड' (स्थानंतरित) या 'एब्सेंट' (अनुपस्थित) श्रेणी में रखकर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। इनमें लगभग 31.59 लाख मतदाता स्थायी रूप से स्थानांतरित और करीब 11 लाख अनुपस्थित या जिनका पता नहीं चल रहा, वे शामिल हैं।
'फॉर्म-6' को लेकर कड़ा ऐतराज़:
अदालत ने इस बात पर खास आपत्ति जताई कि जिन लोगों के नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज हैं, लेकिन जिन्होंने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं किया, उन्हें नए मतदाता की तरह प्रक्रिया से गुजरने और फॉर्म-6 भरने के लिए क्यों कहा जा रहा है। पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल फॉर्म जमा न करने के कारण किसी पात्र नागरिक को मतदाता सूची से बाहर नहीं माना जा सकता।
न्यायालय की बेंच और टिप्पणियाँ:
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति का अस्थायी रूप से कहीं और चले जाना 'स्थायी रूप से शिफ्ट' होना नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब फिलहाल दिल्ली में कोई चुनाव प्रस्तावित नहीं है, तो इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है?
एन्यूमरेशन फॉर्म और समयसीमा:
अदालत की राय है कि ऐसे मतदाता जो पहले से वोटर लिस्ट में थे और अस्थायी कारणों से अपने पते पर उपलब्ध नहीं थे, उनके लिए एन्यूमरेशन फॉर्म को पर्याप्त माना जाना चाहिए। साथ ही, दावे और आपत्तियां दाखिल करने की 30 अक्टूबर 2026 की समयसीमा को आगे बढ़ाने पर विचार करने को कहा गया है, ताकि कोई पात्र मतदाता केवल समयसीमा की वजह से अपने अधिकार से वंचित न रहे।
चुनाव आयोग का रुख:
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डीएस नायडू ने अदालत को बताया कि आयोग समयसीमा बढ़ाने के सुझाव पर विचार करने को तैयार है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया और उठाए गए अन्य सवालों पर विचार कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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