‘मन की बात’ राष्ट्र के जन-जन के परिश्रम, संकल्प और सेवा-भाव का उत्सव: विपिन सिंह परमार
‘मन की बात’ राष्ट्र के जन-जन के परिश्रम, संकल्प और सेवा-भाव का उत्सव: विपिन सिंह परमार
‘वोकल फॉर लोकल’ से भारतीय उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान, हिमाचल के किसानों, कारीगरों और स्थानीय उद्यमियों के लिए भी अपार संभावनाएं।
पालमपुर
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष, सुलह विधानसभा क्षेत्र से विधायक, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री विपिन सिंह परमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 139वीं कड़ी को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम देश के सामान्य नागरिकों के असाधारण योगदान, परिश्रम, साहस, संकल्प, समर्पण और सेवा-भाव को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का सशक्त माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ की 12 वर्ष की यात्रा को तीर्थयात्रा के समान बताना इस कार्यक्रम की आत्मा को अभिव्यक्त करता है, क्योंकि इसके माध्यम से देश के कोने-कोने में समाजहित के लिए कार्य कर रहे लोगों की प्रेरणादायी कहानियां सामने आती हैं।
परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजयादशमी के पावन अवसर पर प्रारंभ हुई इस यात्रा के अनुभव साझा करते हुए देशवासियों के योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया। ‘मन की बात’ केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी, सकारात्मक परिवर्तन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि त्योहारों के इस मौसम में प्रधानमंत्री द्वारा ‘वोकल फॉर लोकल’ पर दिया गया विशेष जोर आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को नई दिशा प्रदान करता है। आज भारतीय उत्पाद देश की सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं। बिहार के मखाने का ग्रीस तक पहुंचना, कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल का मालदीव के बाजार में पहुंचना तथा महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों के उत्पादों को विशिष्ट पहचान मिलना इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय उत्पादों में वैश्विक स्तर पर अपनी जगह बनाने की क्षमता है।
परमार ने कहा कि महाराष्ट्र में ‘शबरी नेचुरल्स’ के माध्यम से शहद, महुआ, चीड़ और बांस से बने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की पहल विशेष रूप से सराहनीय है। इन उत्पादों की पैकेजिंग में आदिवासी कला और सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई देती है। इस पैकेजिंग को जापान के प्रतिष्ठित ‘गुड डिज़ाइन अवार्ड’ से सम्मानित किया जाना भारतीय परंपरा, रचनात्मकता और स्थानीय उद्यमिता की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में ‘खेती विरासत मिशन’ द्वारा प्राकृतिक एवं पारंपरिक कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करके कृषि क्षेत्र में नवाचार और पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया है। ‘नव-त्रिन्जन’ पहल के अंतर्गत रासायनिक पदार्थों के बिना प्राकृतिक कपास की खेती तथा प्राकृतिक रंगों वाली कपास को बढ़ावा देना टिकाऊ कृषि की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। ऐसी पहलें किसानों को वैकल्पिक कृषि पद्धतियों की ओर प्रेरित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान को भी प्रोत्साहित करती हैं।
परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा खादी और स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को प्रोत्साहन देने का आह्वान देश की पारंपरिक कला एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। जब देशवासी स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता देते हैं, तो इसका सीधा लाभ उनके रोजगार, आजीविका और परिवारों की आर्थिक स्थिति को मिलता है। स्वदेशी उत्पादों को अपनाना केवल खरीदारी का विकल्प नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। कांगड़ा की चाय, हिमाचली हस्तशिल्प, चंबा रूमाल, पारंपरिक वस्त्र, स्थानीय खाद्य उत्पाद और क्षेत्रीय स्तर पर तैयार होने वाली अन्य वस्तुएं प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। इन उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, डिजिटल विपणन और बाजार तक पहुंच बेहतर बनाकर स्थानीय उत्पादकों, महिला स्वयं सहायता समूहों, युवाओं तथा छोटे उद्यमियों के लिए नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। प्रदेश के किसानों और कारीगरों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
परमार ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में हेवल नदी और प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण के लिए किए गए सामुदायिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की सहभागिता से वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा पौधारोपण जैसे उपायों के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण संदेश मिलता है। यह उदाहरण बताता है कि जब समाज और प्रशासन मिलकर कार्य करते हैं, तो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्य के लिए यह संदेश विशेष महत्व रखता है। यहां के प्राकृतिक जलस्रोत, नदियां, वन और पर्यावरण प्रदेश की जीवनरेखा हैं। जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, वनों की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को जनआंदोलन बनाना समय की आवश्यकता है। आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
परमार ने प्रधानमंत्री द्वारा दीपावली और छठ जैसे आगामी त्योहारों से पहले स्वच्छता अभियानों पर दिए गए जोर को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की दिनचर्या और सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा होनी चाहिए। घरों, सार्वजनिक स्थलों, बाजारों, धार्मिक स्थलों और अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है। छोटे-छोटे सामूहिक प्रयास व्यापक परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशवासियों को यह संदेश दे रहे हैं कि भारत की प्रगति केवल बड़े शहरों, बड़े उद्योगों या सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है। देश की वास्तविक शक्ति गांवों, किसानों, महिलाओं, युवाओं, कारीगरों, नवाचार करने वाले नागरिकों और समाजहित में निस्वार्थ भाव से कार्य करने वाले लोगों में निहित है। इन सभी की भागीदारी से ही आत्मनिर्भर और विकसित भारत का संकल्प साकार होगा।
परमार ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे दीपावली सहित अन्य त्योहारों के अवसर पर स्वदेशी एवं स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें, स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करें, स्वच्छता को अपनी आदत बनाएं तथा जल एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम हमें यह प्रेरणा देता है कि राष्ट्र निर्माण की शक्ति प्रत्येक नागरिक के भीतर है। ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपनाकर, अपनी परंपराओं का सम्मान करके और समाजहित में छोटे-छोटे प्रयासों को जनआंदोलन बनाकर हम आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को मजबूती प्रदान कर सकते हैं।

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