प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र बनाम महंगी ब्रांडेड दवाइयां: नूरपुर में मरीजों की जेब पर डाका
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र बनाम महंगी ब्रांडेड दवाइयां: नूरपुर में मरीजों की जेब पर डाका
नूरपुर : विनय महाजन /
सिविल नागरिक अस्पताल आज भी रेफर अस्पताल के नाम से जाना जाता है सरकारी डॉक्टरों द्वारा मरीजों को लिखे जाने वाले उपचार में दवाई के साल्ट का नाम नहीं लिखते
नूरपुर प्रदेश के नागरिक अस्पताल नूरपुर में सियासी राजनीति अक्सर होती रहती है जब विधानसभा के चुनाव में नजदीक होते से है l नागरिक अस्पताल नूरपुर में जो 200 बिस्तर का है उसमें आरकेएस की बैठक के बाद भी लिफ्ट का आज तक ठीक ना होना और कई मुद्दों पर आरकेएस की बैठक के फैसलों का धरातल पर अम्लीजामा न पहनाया जाना अस्पताल प्रशासन की कारगुजारी पर अनेकों प्रश्न खड़े करता है ऐसी चर्चाएं क्षेत्र की जनता में चर्चित है l क्षेत्र वासियों का कहना है की प्रदेश में किसी भी पार्टी की सरकार हो लेकिन नागरिक अस्पताल नूरपुर आज भी रैफर हॉस्पिटल के नाम से प्रदेश में जाना जाता हैl क्षेत्र के सरकारी अस्पताल प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र व सिविल डिस्पेंसरी में अक्सर टेस्ट परीक्षण हेतु व एक्स-रे और आदि टेस्ट करवाने के लिए कई प्राइवेट क्षेत्र के एजेंट मरीज को अस्पताल से ले जाते हैं चाहे वह दवाइयां का व्यापार हो चाहे कोई भी हो l प्रधानमंत्री की जन औषधि जो ग्रामीण क्षेत्रों में आजकल धरातल पर काम कर रही हैं जिनके लिए अलग से केमिस्ट शॉप खोली गई है उनके अंतर्गत आने वाले प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र व सिविल हॉस्पिटल नूरपुर में तैनात डॉक्टरों द्वारा ऐसी दवाइयां को मरीजो के लिए नहीं लिखा जाना एक चर्चा का विषय हैl ऐसी दवाइयां मार्केट से काफी सस्ती है l सूत्रों के मुताबिक पता चला है कि सरकारी अस्पतालों में यह निर्देश हैं की कोई भी डॉक्टर दवाई का नाम नहीं लिखेगा अपनी प्रिस्क्रिप्शन में सिर्फ दवाई के साथ का नाम लिखना होगा लेकिन इस पर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई उच्च स्वास्थ्य प्रशासन द्वारा l कुछ सरकारी हॉस्पिटलों में व प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र तथा सिविल डिस्पेंसरी में तैनात डॉक्टर ऐसी मेडिसिन को बाजारों मे मरीजों के लिए लिखते हैं जो बाजार में काफी महंगी होती है और मरीज दवाई लेने से भी कतरा जाता है जिस कारण वह निजी अस्पतालों की तरफ अपना मुख मोड़ता है l इतना ही नहीं सरकारी अस्पतालों में कुछ कंपनियों के एजेंट अक्सर डॉक्टर के कमरे के पास इर्द गिर्द अक्सर घूमते हुए देखे जा सकते है l सिविल हॉस्पिटल नूरपुर में सुरक्षा की जिम्मेदारी एक एनजीओ के अधीन है उसके बावजूद भी जनहित में धरातल पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकीl कुछ लोगों का कहना है कि आज के दौर में सरकारी हॉस्पिटल एक व्यापार का अड्डा बन गए हैं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी l क्षेत्रवासियों व कुछ सामाजिक संस्थाओं ने कांगड़ा चंबा लोकसभा सांसद डॉ राजीव भारद्वाज से आग्रह किया है कि इस संदर्भ में जब भी कांगड़ा और चंबा में आपकी जिला स्तर की बैठक होती है उसमें स्वास्थ्य विभाग के चीफ मेडिकल अधिकारियों को यह निर्देश दिए जाये कि प्रधानमंत्री जन औषधि की सस्ती दवाइयां भी मरीजो को लिखेंl ऐसी आशाएं कांगड़ा चंबा लोकसभा के मतदाताओं ने डॉ राजीव भारद्वाज से की है l

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