पालमपुर बना राम मंदिर आंदोलन के इतिहास का साक्षी, 1989 का संकल्प 2024 में हुआ पूरा : त्रिलोक कपूर
पालमपुर बना राम मंदिर आंदोलन के इतिहास का साक्षी, 1989 का संकल्प 2024 में हुआ पूरा : त्रिलोक कपूर
जय भारत, जय श्री राम के मंत्र के साथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अलख जगाता रहूंगा : त्रिलोक कपूर
पालमपुर।
आज पूरा देश दशहरा उत्सव मना रहा है। दशहरा बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर मेरी ओर से सभी भाई-बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं - त्रिलोक कपूर
भाजपा प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने कहा की संयोगवश पिछले कल रामनवमी के अवसर पर पालमपुर के रोटरी भवन में भगवान श्री राम की जन्मभूमि से जुड़े उस ऐतिहासिक अध्याय को याद करने का अवसर मिला, जिसका संबंध सीधे पालमपुर की धरती से है।
कपूर ने कहा कि राम केवल एक देवता या धार्मिक आस्था का विषय नहीं हैं। राम भारत की आत्मा, ऊर्जा, संस्कृति और जीवन मूल्यों के आधार हैं। श्री राम भारत की आस्था, सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना के सर्वोच्च केंद्र हैं। वे केवल हमारे आराध्य नहीं, बल्कि हमारे जीवन जीने की पद्धति और जीवन के आदर्श हैं।
कपूर ने कहा कि आज जब हम अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर को देखते हैं, तो हमें उस लंबे संघर्ष और उस संकल्प को भी याद करना चाहिए, जिसकी शुरुआत पालमपुर से जुड़े एक ऐतिहासिक निर्णय से हुई थी।
उन्होंने बताया की वर्ष 1989 में 9 से 11 जून तक भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक पालमपुर में आयोजित हुई थी। तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लालकृष्ण आडवाणी जी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में श्री राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया। उस समय हिमाचल प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष माननीय श्री शांता कुमार जी थे और उनके प्रयासों से ही यह ऐतिहासिक राष्ट्रीय कार्य समिति पालमपुर में आयोजित हुई थी।
उस संकल्प के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक यात्रा की। इस यात्रा से देशभर में राम मंदिर आंदोलन को नई ऊर्जा मिली। लाखों-करोड़ों राम भक्त इस आंदोलन से जुड़े। इसके बाद 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचे का विध्वंस हुआ।
कपूर ने कहा की राम मंदिर के इस संघर्ष में सैकड़ों राम भक्तों ने अपना बलिदान दिया। भाजपा शासित राज्यों को भी राजनीतिक रूप से इसकी कीमत चुकानी पड़ी। हिमाचल प्रदेश की तत्कालीन शांता कुमार के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार भी इससे अछूती नहीं रही।
वर्ष 1989 में लिए गए उस संकल्प से लेकर 22 जनवरी 2024 तक लगभग 35 वर्षों का लंबा संघर्ष चला। अंततः 22 जनवरी 2024 को देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी के कर कमलों से अयोध्या में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई।
भाजपा नेता ने कहा जिस बात का वर्षों तक उपहास उड़ाया गया और कहा जाता था कि “मंदिर वहीं बनाएंगे, तारीख नहीं बताएंगे”, वह संकल्प आज भव्य राम मंदिर के रूप में हमारे सामने है। राष्ट्रवाद का मंदिर बन गया, हमारे राम का मंदिर बन गया। यह ऐतिहासिक कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में संभव हो पाया।
कपूर ने कहा की यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि जिस ऐतिहासिक संकल्प ने राम मंदिर आंदोलन को राजनीतिक और राष्ट्रीय दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उस संकल्प की गूंज पालमपुर की इसी धरती से उठी थी। इसलिए शांता कुमार की यह दिल की इच्छा थी कि उस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में रोटरी भवन में एक स्वर्ण पट्टिका स्थापित की जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी पालमपुर से जुड़े इस इतिहास को याद रख सकें।
कपूर ने कहा इसी अवसर पर रोटरी के संस्थापक एवं समाजसेवा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पालमपुर के पूर्व विधायक डॉ शिव कुमार की मूर्ति के अनावरण का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।मुझे प्रसन्नता है कि इस कार्यक्रम में राम भक्तों को जोड़ने और बड़ी संख्या में लोगों को कार्यक्रम तक लाने का जिम्मा मेरे कंधों पर था। मैंने अपनी पूरी क्षमता और ईमानदारी से प्रयास किया कि कार्यक्रम की सफलता में कोई कमी न रहे।
प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता कपूर ने कहा कि मैं पालमपुर की देवतुल्य जनता और सभी भाई-बहनों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। एक ओर फसल कटाई का कार्य पूरे जोर-शोर से चल रहा था और दूसरी ओर रामनवमी के धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हो रहे थे, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग रोटरी भवन पहुंचे। मैं अपनी ओर से और अपनी पूरी टीम की ओर से सभी राम भक्तों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।
भाजपा नेता कपूर ने कहा कि कल इसी रोटरी भवन में मैंने एक और संकल्प लिया है—भारत की राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अलख जगाने के लिए मुझे चाहे जितने भी अपमान के कड़वे घूंट पीने पड़ें, मैं अपने संकल्प से पीछे नहीं हटूंगा।

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