यूजीसी मुद्दे पर रुमित ठाकुर की पदयात्रा को मिल रहा समर्थन: साधू राम राणा
यूजीसी मुद्दे पर रुमित ठाकुर की पदयात्रा को मिल रहा समर्थन: साधू राम राणा
हिमाचल प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच सत्ता को लेकर जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच रुमित ठाकुर के नेतृत्व में यूजीसी के मुद्दे पर शुरू हुई पदयात्रा को लेकर पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं डोल पधर पंचायत निवासी साधू राम राणा ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
साधू राम राणा ने कहा कि यूजीसी के मुद्दे तथा एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की मांग को लेकर रुमित ठाकुर के नेतृत्व में शुरू की गई पदयात्रा को विभिन्न स्थानों पर मिल रहे समर्थन से प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना पर चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि इस जनसमर्थन का असर वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिलता है, तो प्रदेश की राजनीति में नए बदलाव सामने आ सकते हैं।
राणा ने कहा कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में सवर्ण समाज के समर्थन के सहारे सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए बैठी है, लेकिन यूजीसी के मुद्दे को लेकर सवर्ण समाज के एक वर्ग में भाजपा के प्रति नाराजगी होने का दावा किया जा रहा है। उनके अनुसार, इस मुद्दे पर रुमित ठाकुर की ओर लोगों का रुझान बढ़ता दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन योजना के मुद्दे पर भी प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के एक वर्ग में भाजपा के प्रति असंतोष रहा है। ऐसे में आगामी चुनाव में यूजीसी, पुरानी पेंशन योजना और अन्य नीतिगत मुद्दे राजनीतिक चर्चा को प्रभावित कर सकते हैं।
साधू राम राणा ने केंद्र सरकार से यूजीसी से संबंधित प्रावधानों और एससी-एसटी एक्ट को लेकर उठाई जा रही आपत्तियों पर विचार करने तथा आवश्यक संशोधन करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि इन मुद्दों पर समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस से जुड़े सवर्ण मतदाताओं का एक वर्ग रुमित ठाकुर या नोटा को विकल्प के रूप में चुन सकता है।
उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में इन मुद्दों का कितना प्रभाव पड़ेगा, यह मतदाताओं के रुख और चुनाव के समय सामने आने वाली परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
ज्वाली से राजेश कतनौरिया !

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