अखिल बख्शी की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का चौथा दिन, प्रशासन और सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल
अखिल बख्शी की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का चौथा दिन, प्रशासन और सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल
जसूर राकेश शर्मा
नूरपुर में अखिल बख्शी जी द्वारा शुरू की गई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आज चौथे दिन में प्रवेश कर गई है। बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक बात है कि अभी तक न तो प्रशासन ने, न ही शासन ने और न ही उन नेताओं ने, जिन्होंने मातृ-शिशु अस्पताल को लेकर बड़े-बड़े दावे और वादे किए हैं, अखिल बख्शी जी की सुध लेने की कोई गंभीर पहल की है।
आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन और शासन में बैठे लोगों के भीतर इंसानियत नाम की कोई चीज़ बची है या नहीं?
आखिर अखिल बख्शी जी की मांगें क्या हैं? उनकी मांगें किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि नूरपुर की जनता के हित में हैं।
मुख्य मांगें हैं:
1. मातृ-शिशु अस्पताल नूरपुर को जल्द से जल्द जनता को समर्पित किया जाए।
2. रणजीत बख्शी जनकल्याण सभा, जो समाजसेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, को रोगी कल्याण समिति (RKS) में शामिल किया जाए।
ये मांगें न तो असंभव हैं और न ही किसी व्यक्ति विशेष के हित से जुड़ी हुई हैं। ये मांगें नूरपुर की जनता के स्वास्थ्य और जनहित से जुड़ी हुई हैं।
आज जरूरत है कि शासन और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी समझे और इस शांतिपूर्ण आंदोलन की आवाज़ को सुने। शर्म आनी चाहिए हर उस व्यक्ति को, जो आज इस पूरे मामले पर गूंगा और बहिरा बना हुआ है।
इस संघर्ष में अपनी आवाज़ बुलंद करने वाले अखिल बख्शी जी को सलाम, और नूरपुर की उन तमाम जनता को भी सलाम, जो लगातार इस जनहित की मुहिम को अपना समर्थन देकर आगे बढ़ा रही है।
अब सवाल सिर्फ अखिल बख्शी जी का नहीं, बल्कि नूरपुर की जनता के अधिकार और सम्मान का है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें