CJP और स्थानीय लोगों का विरोध, पुलिस की अनुमति से इनकार और CJP का रुख
CJP और स्थानीय लोगों का विरोध, पुलिस की अनुमति से इनकार और CJP का रुख
महाराष्ट्र: स्थानीय नागरिकों और निवासियों का कहना है कि उन्हें किसी भी संगठन के शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के अधिकार से कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, शिवाजी पार्क जैसे घने रिहायशी इलाके, जहां आसपास स्कूल और अस्पताल भी स्थित हैं, में बार-बार होने वाले बड़े जमावड़ों से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। प्रदर्शन के दौरान होने वाली भीड़, हंगामे, शोर और ट्रैफिक जाम के कारण स्थानीय लोगों और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी को लेकर मंगलवार को स्थानीय लोगों और CJP कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोक भी हुई। नागरिकों ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि यदि ऐसा कोई आयोजन होता है, तो सुरक्षा और ट्रैफिक के कड़े इंतजाम किए जाएं।
पुलिस की अनुमति से इनकार और CJP का रुख
मुंबई पुलिस ने सुरक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था, स्थानीय निवासियों की आपत्तियों और सभा से जुड़े नियमों का हवाला देते हुए CJP को 2 अक्टूबर को शाम 4 बजे गेट नंबर 6 के पास होने वाले इस प्रदर्शन के लिए अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया था। पुलिस ने संगठन को इसके लिए कोई वैकल्पिक जगह तलाशने की सलाह दी थी इसके बावजूद, CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके ने अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम पर अड़े रहने की बात कही है। पुलिस की अनुमति न मिलने के बाद संगठन ने शिवाजी पार्क में ही 'जेल भरो आंदोलन' चलाने का ऐलान किया है।
CJP की प्रमुख मांगें और आगे की रणनीति
CJP इस आंदोलन के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की पुरजोर मांग कर रही है। संगठन ने मतदाता सूची में बदलाव और SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनकी प्रमुख मांगों में SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम पुनः बहाल करना और वर्ष 2025 की मतदाता सूची को ही बनाए रखना शामिल है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो इस आंदोलन को और व्यापक बनाते हुए अक्टूबर के अंत में दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। दूसरी ओर, चुनाव आयोग (ECI) ने इन تمام आरोपों को खारिज करते हुए अपनी चुनावी प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी बताया है, इसलिए इन दावों को फिलहाल आरोपों के रूप में ही देखा जा रहा है।

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