यूनिटी स्कूल रिवालसर में सजी मेहंदी की छटा, छात्राओं ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा
यूनिटी स्कूल रिवालसर में सजी मेहंदी की छटा, छात्राओं ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा
प्राइमरी, मिडिल और सीनियर विंग की विद्यार्थियों ने लिया उत्साहपूर्वक भाग, विजेताओं को किया सम्मानित
रिवालसर : अजय सूर्या /
यूनिटी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल रिवालसर में विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने और भारतीय संस्कृति एवं पारंपरिक कला के प्रति रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यालय के प्राइमरी, मिडिल और सीनियर विंग की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने हुनर और कलात्मक कौशल का शानदार प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता के दौरान छात्राओं ने अपने हाथों पर आकर्षक, सुंदर और मनमोहक मेहंदी डिज़ाइन उकेरकर अपनी कल्पनाशीलता और रचनात्मकता का परिचय दिया। मेहंदी की बारीक डिज़ाइनों और अनूठी कलाकृतियों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। प्रतियोगिता में छात्राओं का उत्साह देखते ही बनता था।
तीनों विंगों में इन विद्यार्थियों ने मारी बाजी
प्रतियोगिता के परिणाम तीनों विंगों के आधार पर घोषित किए गए। प्राइमरी विंग में यक्शिता (कक्षा चौथी) ने प्रथम, आराध्या और आरुषी (कक्षा पांचवीं) ने द्वितीय तथा शानवी (कक्षा पांचवीं) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
मिडिल विंग में स्नेहा (कक्षा सातवीं) ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि वंशिका (कक्षा छठी) और ललिता (कक्षा आठवीं) द्वितीय स्थान पर रहीं। संजना और नव्या (कक्षा आठवीं) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
वहीं, सीनियर विंग में दीक्षा (+2) और रिया (कक्षा नौवीं) ने प्रथम स्थान हासिल किया। इशिता और अनिषा (कक्षा नौवीं) तथा दिव्या (कक्षा दसवीं) द्वितीय स्थान पर रहीं। कुशांगी और प्रेरणा (कक्षा दसवीं) तथा वैष्णवी (कक्षा ग्यारहवीं) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन मेहंदी डिज़ाइनों की सुंदरता, बारीकी, रचनात्मकता और कलात्मक कौशल के आधार पर किया गया। विजेता विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया गया।
सर्वांगीण विकास में सहायक हैं ऐसी गतिविधियां : डी. डी. शर्मा
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री डी. डी. शर्मा ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभा को सामने लाने और उनके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की रचनात्मक, सांस्कृतिक और व्यावहारिक क्षमताओं को विकसित करना भी है।
उन्होंने सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को भविष्य में भी ऐसी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, एकाग्रता, धैर्य और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन्हें भारतीय संस्कृति और पारंपरिक कलाओं से जोड़ने में भी सहायक होते हैं।

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