सर्पदंश से बचाव और समय पर उपचार पर जोर, नूरपुर में सर्पा सहायकों’ का प्रशिक्षण आयोजित

 सर्पदंश से बचाव और समय पर उपचार पर जोर, नूरपुर में सर्पा सहायकों’ का प्रशिक्षण आयोजित

 नूरपुर से विनय महाजन 


नूरपुर सर्पदंश से होने वाली मौतों और दिव्यांगता को रोकने तथा समय पर चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आज  नूरपुर के सामुदायिक भवन में आईसीएमआर की ‘सर्पा’ परियोजना के अंतर्गत नूरपुर ब्लॉक में चयनित सर्पा सहायकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम ‘जीरो स्नेकबाइट डेथ इनिशिएटिव’ के तहत सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने और सर्पदंश की रोकथाम के प्रति जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। कांगड़ा जिले के नूरपुर और ज्वालामुखी ब्लॉकों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हिमाचल प्रदेश के सहयोग से इस परियोजना को कार्यान्वित किया जा रहा है।                        *इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खंड विकास अधिकारी, नूरपुर अशोक कुमार ने सभी पंचायती राज संस्थाओं  के प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे सर्पदंश से बचाव और जागरूकता से जुड़े विषयों को ग्रामसभा की बैठकों में प्रमुखता से शामिल करें। और  उन्होंने कहा कि विशेषकर मानसून से पहले ग्रामीण समुदायों को जागरूक करना आवश्यक है, ताकि सर्पदंश की घटनाओं को कम किया जा सके और किसी भी घटना की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को बिना देरी अस्पताल पहुंचाया जा सके। उन्होंने बचाव के उपायों, सही प्राथमिक उपचार और तत्काल अस्पताल पहुंचने के महत्व की जानकारी व्यापक स्तर पर प्रसारित करने पर बल दिया।*                          इस कार्यक्रम में  परियोजना अनुसंधान वैज्ञानिक डॉ. अर्चना फुल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी नूरपुर डॉ. सतीश पॉल, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिलबर सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी कांगड़ा डॉ. आर.के. सूद, चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. आशीष, डॉ राजीव, सर्पा परियोजना के तकनीकी सहयोगी निकुंज कंकोड़िया तथा स्थानीय सर्प रेस्क्यूअर कृष्ण ने विभिन्न विषयों पर जानकारी प्रदान की।                               *प्रशिक्षण के दौरान  आज प्रतिभागियों को सर्पदंश से बचाव के व्यावहारिक उपायों के बारे में बताया गया। खेतों में काम करते समय गमबूट पहनने, लंबी घास में चलते समय डंडे का इस्तेमाल करने, पशुशालाओं में पर्याप्त रोशनी रखने तथा घरों और आसपास के क्षेत्रों को ऐसी वस्तुओं से मुक्त रखने पर जोर दिया गया, जहां सांप छिप सकते हैं। मानसून के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता भी बताई गई।*                                                    इस अवसर पर विशेषज्ञों ने बताया कि सर्पदंश की आशंका होने पर प्रभावित व्यक्ति को शांत रखें, उसकी अनावश्यक गतिविधियां कम करें और तुरंत अस्पताल पहुंचाएं। घाव को काटने, बांधने या जहर चूसने, घरेलू उपचार अपनाने तथा झाड़-फूंक या धार्मिक उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने में देरी करने से बचना चाहिए। पलकों का झुकना, धुंधला दिखाई देना, निगलने में कठिनाई, रक्तस्राव और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेने की सलाह दी गई। एंटी-स्नेक वेनम  का उपयोग चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार केवल योग्य स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा किया जाना चाहिए।*                                **इस कार्यक्रम में सिविल अस्पताल नूरपुर में वर्ष 2021 से 2025 के दौरान दर्ज 222 सर्पदंश मामलों की पांच वर्षीय समीक्षा के निष्कर्ष भी साझा किए गए। समीक्षा में अस्पताल पहुंचने में देरी, एंबुलेंस सेवाओं का कम उपयोग तथा चिकित्सा सहायता लेने से पहले धार्मिक स्थलों पर जाने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की पहचान की गई, जिन पर जागरूकता और सामुदायिक हस्तक्षेप के माध्यम से काम करने की आवश्यकता है।*                               *परियोजना दल ने आज तक  जनवरी 2026 से अब तक 33 ग्राम पंचायतों में जागरूकता गतिविधियां आयोजित की हैंl इस कार्यक्रम में आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं के उपयोग को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक उपचार की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय प्रशासन और सामुदायिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।*                                           *इस अवसर पर नागनी माता मंदिर के ट्रस्टी प्रीतम सिंह अभिषेक को उनके निरंतर सहयोग के लिए सम्मानित किया गया। कामाक्षी इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग की छात्राओं ने सर्पदंश से बचाव और जागरूकता पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर महत्वपूर्ण संदेश दिया, जिसकी सराहना की गई। आयोजकों ने स्वास्थ्य कर्मियों, पंचायत प्रतिनिधियों, मीडिया तथा कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सभी हितधारकों के योगदान की प्रशंसा की।*

*डॉ. अर्चना फुल ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए उपस्थित अतिथियों, विशेषज्ञों, विद्यार्थियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। *                  * इस कार्यक्रम का मुख्य संदेश यह है कि पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि ग्रामसभा की बैठकों के माध्यम से सर्पदंश से बचाव के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं, विशेषकर मानसून से पहले। किसी भी संदिग्ध सर्पदंश की स्थिति में घरेलू उपचार या झाड़-फूंक में समय गंवाने के बजाय प्रभावित व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाना जीवन बचाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।*

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