रिवालसर में 19 वर्षों से निरंतर हो रहा श्री शतचंडी महायज्ञ, मां ज्वाला जी की ज्योति की पूर्णाहुति के बाद विशाल भंडारे का आयोजन
रिवालसर में 19 वर्षों से निरंतर हो रहा श्री शतचंडी महायज्ञ, मां ज्वाला जी की ज्योति की पूर्णाहुति के बाद विशाल भंडारे का आयोजन
लौमस ऋषि बाबा धजाधारी के प्रांगण में उमड़े श्रद्धालु, रात्रि जागरण में मां भगवती का गुणगान; स्वामी श्री गंगानंद जी की प्रेरणा से निभाई जा रही धार्मिक परंपरा
अजय सूर्या नेरचौक। मंडी जिले की त्रिवेणी धर्मस्थली रिवालसर में श्री शतचंडी महायज्ञ का आयोजन इस वर्ष लौमस ऋषि बाबा धजाधारी के पावन प्रांगण में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ किया गया। श्री राधाकृष्ण सहायक कमेटी एवं धर्मसभा के सहयोग से आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान ने निरंतर 19 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर मां भगवती जगदंबा श्री ज्वाला जी की पावन ज्योति के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
आयोजन के तहत सोमवार को मां ज्वाला जी की पवित्र ज्योति रिवालसर लाई गई, जहां श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत कर माता के दर्शन किए। रात्रि में विशाल जागरण का आयोजन किया गया, जिसमें मां भगवती का गुणगान कर वातावरण को भक्तिमय बनाया गया। मंगलवार को विधिवत पूजा-अर्चना के साथ ज्योति की पूर्णाहुति की गई। इसके उपरांत श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
19 वर्षों से कायम है धार्मिक परंपरा
आयोजन से जुड़े आयोजकों ने बताया कि रिवालसर में मां ज्वाला जी की ज्योति लाने और श्री शतचंडी महायज्ञ के आयोजन की परंपरा पिछले 19 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। इस धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने में रिवालसर के लोगों का विशेष योगदान रहा है। क्षेत्रवासी हर वर्ष सामूहिक रूप से इस आयोजन में भाग लेकर अपनी आस्था और श्रद्धा प्रकट करते हैं।
उन्होंने कहा कि श्रद्धेय स्वामी श्री गंगानंद जी की प्रेरणा से सभी लोग एकजुट होकर इस धार्मिक कार्यक्रम को सफल बनाते हैं। आयोजन का उद्देश्य मां भगवती की आराधना के साथ क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करना है।
इस अवसर पर मां भगवती से प्रार्थना की गई कि आगामी वर्ष सभी के जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आए तथा माता रानी की कृपा समस्त क्षेत्रवासियों पर सदैव बनी रहे।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें