न्यू कृष्णा नाटक क्लब जसूर ने निभाई 52 वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा, स्वर्गीय आरीश शर्मा की स्मृति में संपन्न हुई झंडा रस्म
न्यू कृष्णा नाटक क्लब जसूर ने निभाई 52 वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा, स्वर्गीय आरीश शर्मा की स्मृति में संपन्न हुई झंडा रस्म
जसूर : राकेश शर्मा /
सुबह-शाम पूजा-अर्चना के दौरान दिवंगत सदस्य की याद में रखा जाता रहा दो मिनट का मौन, शोक की इस घड़ी में परिवार की भावनाओं का सम्मान करते हुए नहीं किया गया रामलीला का मंचन
जसूर क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान बन चुके न्यू कृष्णा नाटक क्लब द्वारा इस वर्ष भी अपनी वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए विधिवत झंडा रस्म संपन्न की गई। हालांकि इस बार क्लब के समर्पित एवं सक्रिय सदस्य स्वर्गीय आरीश शर्मा के आकस्मिक निधन के कारण रामलीला का मंचन नहीं किया गया। क्लब के सदस्यों ने दिवंगत साथी की स्मृति में श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करते हुए धार्मिक परंपराओं को सादगी के साथ निभाया।
उल्लेखनीय है कि न्यू कृष्णा नाटक क्लब की स्थापना वर्ष 1974 में हुई थी। पिछले 52 वर्षों से यह क्लब भगवान श्रीराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करता आ रहा है। इस वर्ष क्लब की 52वीं रामलीला का अवसर था, लेकिन एक प्रिय साथी के असमय बिछुड़ जाने के कारण पूरे क्लब परिवार में शोक का वातावरण रहा।
सुबह-शाम पूजा-अर्चना के साथ दी जाती रही श्रद्धांजलि
न्यू कृष्णा नाटक क्लब की ओर से प्रतिदिन सुबह और शाम विधिवत पूजा-अर्चना की जाती रही। इस दौरान दोनों समय स्वर्गीय हरीश शर्मा की पावन स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती थी।
क्लब के सदस्यों के लिए यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अपने उस साथी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी, जिसने वर्षों तक रामलीला के सफल आयोजन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। पूजा-अर्चना के दौरान सदस्यों ने उन्हें याद करते हुए उनके सेवाभाव, मेहनत और समर्पण को नमन किया।
भारतीय संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का दिया संदेश
हमारी भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं में धार्मिक आस्था के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं, दुख-सुख में एक-दूसरे का साथ देने और शोकग्रस्त परिवार की भावनाओं का सम्मान करने को विशेष महत्व दिया जाता है।
इसी भावना को ध्यान में रखते हुए न्यू कृष्णा नाटक क्लब ने इस वर्ष रामलीला का मंचन नहीं करने का निर्णय लिया। क्लब के सदस्यों का मानना है कि जब अपने ही परिवार का कोई प्रिय सदस्य संसार से विदा हो जाए, तो ऐसे समय में उत्सव और उल्लास से जुड़े आयोजनों को सादगी में बदलकर शोक संतप्त परिवार के दुख में सहभागी बनना हमारी संस्कृति की सुंदर पहचान है।
क्लब ने यह संदेश दिया कि धर्म केवल पूजा-पाठ और मंचन तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना, दुख में साथ खड़ा होना और मानवता का परिचय देना भी सच्चे धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
क्लब का उद्देश्य किसी भी प्रकार से दिवंगत सदस्य के परिवार की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। इसी कारण इस वर्ष रामलीला का मंचन स्थगित रखते हुए केवल धार्मिक पूजा-अर्चना और झंडा रस्म की परंपरा निभाई गई।
अरीश शर्मा की कमी हमेशा महसूस करेगा क्लब परिवार
स्वर्गीय अरीश शर्मा न्यू कृष्णा नाटक क्लब के एक कर्मठ, समर्पित और सक्रिय सदस्य थे। रामलीला के प्रति उनका विशेष लगाव था। वह आयोजन की तैयारियों से लेकर विभिन्न व्यवस्थाओं में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। उनकी मेहनत, सेवाभाव और सहयोग की भावना ने क्लब को हमेशा मजबूती प्रदान की।
उनका अचानक इस संसार से चले जाना न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे न्यू कृष्णा नाटक क्लब के लिए अपूरणीय क्षति है। क्लब के सदस्यों ने कहा कि हरीश शर्मा भले ही आज शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें, उनके संस्कार और रामलीला के प्रति उनका समर्पण हमेशा जीवित रहेगा।
संदीप पंजोलिया जी का रामलीला में रहता है सराहनीय योगदान
जसूर की जानी-मानी हस्ती संदीप पंजोलिया जी का भी न्यू कृष्णा नाटक क्लब की रामलीला में विशेष योगदान रहता है। वह रामलीला के सफल आयोजन के लिए दिन-रात एक कर देते हैं। मंच की तैयारियों, व्यवस्थाओं और अन्य धार्मिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी सराहनीय रहती है।
उनके साथ क्लब के अन्य सदस्य भी पूरे समर्पण के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर राजेश काका, सचिन शर्मा, अश्वनी कुमार, अच्छी, राहुल, बंटी और संदीप पंजोलिया जी सहित क्लब के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने स्वर्गीय आरीश शर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
रामलीला केवल मंचन नहीं, हमारी संस्कृति और संस्कारों की पहचान
पिछले 52 वर्षों से न्यू कृष्णा नाटक क्लब जसूर क्षेत्र में धार्मिक आस्था और सामाजिक भाईचारे की मिसाल पेश करता आ रहा है। क्लब ने इस बार रामलीला का मंचन न करके यह साबित किया कि धार्मिक परंपराओं का वास्तविक उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, संवेदना और एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनना भी है।
इस वर्ष रामलीला के मंच पर भगवान श्रीराम की लीलाओं का मंचन भले ही नहीं हुआ, लेकिन क्लब ने अपने दिवंगत साथी के प्रति सम्मान, संवेदना और मानवता का जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह स्वयं भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति की मूल भावना को दर्शाता है।

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