RCFC बचाओ आंदोलन के 66वें दिन किसान सभा ने संभाला मोर्चा, शिफ्टिंग नोटिफिकेशन रद्द करने की मांग
RCFC बचाओ आंदोलन के 66वें दिन किसान सभा ने संभाला मोर्चा, शिफ्टिंग नोटिफिकेशन रद्द करने की मांग
किसान सभा ने चेताया—मांग पूरी नहीं हुई तो गांव-गांव में किसानों को लामबंद कर तेज किया जाएगा संघर्ष
अजय सूर्या मंडी जोगिंदर नगर। जोगिंदर नगर स्थित क्षेत्रीय सुविधा एवं सह-सुविधा केंद्र (RCFC) को सोलन शिफ्ट करने की अधिसूचना रद्द करवाने की मांग को लेकर जारी क्रमिक भूख हड़ताल शनिवार को 66वें दिन में प्रवेश कर गई। इस दौरान हिमाचल किसान सभा के एक बड़े जत्थे ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया और भूख हड़ताल पर बैठे लोगों के साथ धरना दिया।
किसान सभा की चौंतड़ा क्षेत्रीय कमेटी के अध्यक्ष सुदर्शन वालिया, लांगणा क्षेत्रीय कमेटी के प्रधान मनीष शर्मा, बीडीसी सदस्य एवं किसान सभा की नेत्री इंदिरा देवी, भैरू इकाई की प्रधान विद्या देवी सहित नम्रता देवी, रेणू देवी, संतोष कुमारी और सुरेश ठाकुर ने आंदोलन में भाग लिया। संघर्ष समिति के महासचिव अजय ठाकुर ने किसान सभा के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए विशेष रूप से महिलाओं के योगदान के लिए आभार जताया।
इस अवसर पर किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष एवं संघर्ष समिति के संयोजक कुशाल भारद्वाज सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि किसान सभा इस आंदोलन के पहले दिन से साथ खड़ी है। जब तक RCFC को सोलन शिफ्ट करने की अधिसूचना रद्द नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने प्रदेश सरकार से केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी पैरवी करने तथा केंद्र सरकार से इस प्रतिष्ठित संस्थान को किसी भी सूरत में जोगिंदर नगर से शिफ्ट न करने की मांग की। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि खेती का काम समाप्त होते ही गांव-गांव में किसानों को लामबंद कर आंदोलन तेज किया जाएगा।
केंद्रीय आयुष मंत्री से बातचीत को बताया सकारात्मक
संघर्ष समिति के अध्यक्ष गुरुशरण परमार, संयोजक कुशाल भारद्वाज, महासचिव अजय ठाकुर, मुख्य सलाहकार ज्ञान चंद ठाकुर, बीडी बहल, बृज गोपाल अवस्थी, उपाध्यक्ष लाभ सिंह ठाकुर, दमनदीप सिंह और सचिव कर्म चंद ने संयुक्त बयान में कहा कि केंद्रीय आयुष मंत्री के साथ हाल ही में हुई बातचीत सकारात्मक रही है। समिति को उम्मीद है कि मंत्री अपने आश्वासन पर अमल करते हुए जोगिंदर नगर सहित मंडी, कांगड़ा, हमीरपुर, चंबा, कुल्लू और लाहौल-स्पीति के लोगों के साथ-साथ अन्य राज्यों के लाभार्थी किसानों के हितों का भी ध्यान रखेंगे।
समिति ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि जनता के धैर्य की परीक्षा न ली जाए और उसे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर न किया जाए।

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