राष्ट्रीय औसत की आड़ में अपनी पीठ थपथपाना बंद करें सरकार , समाचार पत्र के आंकड़े खोल रहे हैं बदहाल शिक्षा व्यवस्था की पोल: संजय शर्मा

 राष्ट्रीय औसत की आड़ में अपनी पीठ थपथपाना बंद करें सरकार , समाचार पत्र के आंकड़े खोल रहे हैं बदहाल शिक्षा व्यवस्था की पोल: संजय शर्मा


धर्मशाला:


भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजय शर्मा ने राज्य के शिक्षा मंत्री और वर्तमान प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार राष्ट्रीय औसत (National Average) के आंकड़ों का सहारा लेकर अपनी पीठ थपथपाने और झूठी वाहवाही लूटने का प्रयास कर रही है। संजय शर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि जमीनी हकीकत इन कागजी आंकड़ों से कोसों दूर है और समाचार पत्रों में लगातार आ रहे आंकड़े राज्य की चरमराती शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।

भाजपा प्रवक्ता ने सरकार को तथ्यों के साथ घेरते हुए कहा कि जहां एक तरफ शिक्षा मंत्री बड़े-बड़े सुधारों के खोखले दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के हजारों नौनिहालों का भविष्य अंधकार में डूबा हुआ है। हालिया सरकारी व मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए संजय शर्मा ने कुछ अत्यंत चिंताजनक तथ्य और आधिकारिक आंकड़े जनता के सामने रखे:

* शिक्षकों के बिना चल रहे स्कूल: प्रदेश में वर्तमान में 150 से अधिक स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक तैनात नहीं है। इन स्कूलों में ताले लटकने की नौबत आ चुकी है। क्या शिक्षा मंत्री इसी 'बदलाव' का राष्ट्रीय औसत दिखा रहे हैं?

* एकल-शिक्षक (Single-Teacher) स्कूलों की बाढ़: राज्य में 3,315 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जिनमें 3,214 प्राथमिक (Primary) और 101 माध्यमिक (Middle) स्कूल शामिल हैं।

* हजारों छात्रों का भविष्य अधर में: रिपोर्टों के अनुसार, प्रदेश के लगभग 50,000 छात्र (सटीक रूप से 47,579 बच्चे) या तो बिना शिक्षक वाले स्कूलों में पढ़ रहे हैं या एकल-शिक्षक के सहारे भगवान भरोसे हैं।

* सरकारी स्कूलों से मोहभंग: ASER (Annual Status of Education Report) के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी स्कूलों में 6-14 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के नामांकन (Enrollment) में गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही, 15-16 वर्ष के स्कूल न जाने वाले (Drop-out) बच्चों का ग्राफ भी 2.2% से बढ़कर 3% हो गया है। यह दिखाता है कि जनता का सरकारी तंत्र से भरोसा उठ चुका है।

संजय शर्मा ने सरकार पर तीखा तंज कसते हुए कहा, "जब प्रदेश के 50 हजार बच्चे बिना पर्याप्त शिक्षकों के पढ़ रहे हैं, तो शिक्षा मंत्री किस मुंह से अंतरराष्ट्रीय भाषाओं और बड़े सुधारों की बात करते हैं? सुक्खू सरकार की प्राथमिकता शिक्षा व्यवस्था को सुधारना नहीं, बल्कि अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए आंकड़ों की बाजीगरी करना है।"

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ तर्कसंगतता (Rationalization) के नाम पर गरीब बच्चों के स्कूल बंद कर रही है और दूसरी तरफ राज्य के युवाओं को रोजगार देने के बजाय केवल खोखले विज्ञापनों और बयानों तक सीमित है। हजारों पद खाली पड़े हैं, लेकिन राज्य चयन आयोग और लोक सेवा आयोग के माध्यम से होने वाली भर्तियां कछुआ गति से चल रही हैं।

भारतीय जनता पार्टी मांग करती है कि शिक्षा मंत्री राष्ट्रीय औसत की आड़ में छिपना बंद करें और तुरंत एक श्वेत पत्र (White Paper) जारी कर यह बताएं कि प्रदेश के एकल-शिक्षक और शून्य-शिक्षक वाले स्कूलों में नियमित अध्यापकों की तैनाती कब तक की जाएगी। यदि सरकार ने जल्द ही इन 50,000 बच्चों के भविष्य को सुधारने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए, तो भाजपा सड़कों पर उतरकर इस गूंगी-बहरी सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन छेड़ेगी।

जारीकर्ता,

संजय शर्मा

प्रदेश प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी

हिमाचल प्रदेश

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