उद्घाटन के वर्षों बाद भी शुरू नहीं हो सका नूरपुर का मदर-चाइल्ड अस्पताल
उद्घाटन के वर्षों बाद भी शुरू नहीं हो सका नूरपुर का मदर-चाइल्ड अस्पताल
नूरपुर, विनय महाजन । नूरपुर में लगभग छह वर्ष पूर्व निर्मित मदर-चाइल्ड अस्पताल भवन उद्घाटन के बाद भी आज तक पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया है। क्षेत्र की जनता को अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह परियोजना अब तक अधूरी बनी हुई है। चुनावी वर्ष के आगमन के साथ यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है।
जानकारी के अनुसार, विधानसभा चुनाव से कुछ माह पूर्व तत्कालीन वन मंत्री एवं स्थानीय विधायक राकेश पठानिया द्वारा अस्पताल भवन का उद्घाटन किया गया था। उस समय भवन में न तो पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध था और न ही बिजली-पानी सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं पूरी तरह से स्थापित थीं। इसके चलते उद्घाटन के बावजूद अस्पताल में नियमित स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं।
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अस्पताल भवन में बिजली, पानी तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं को पूरा करने का मामला पूर्व विधायक अजय महाजन द्वारा स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया गया। इसके बाद प्रदेश सरकार ने अस्पताल की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लगभग पांच करोड़ रुपये का बजट जारी किया। बजट स्वीकृत होने के बाद भवन के लंबित कार्यों में तेजी आई और अधिकांश निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया।
हालांकि भवन का अधिकांश कार्य पूरा होने के बावजूद अस्पताल में सेवाएं शुरू करने के लिए आवश्यक स्टाफ की तैनाती अभी भी प्रतीक्षित है। इस कारण अस्पताल भवन उपयोग में नहीं आ पा रहा है और क्षेत्र की जनता को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा।
इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भवन अभी तक निर्माण कंपनी के पास है। जब तक निर्माण कंपनी अस्पताल भवन को औपचारिक रूप से विभाग को हैंडओवर नहीं करती, तब तक अस्पताल का संचालन शुरू करना संभव नहीं है। विभाग का कहना है कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना कठिन हो सकता है। इसलिए निर्माण एजेंसी को शेष कार्य शीघ्र पूरा कर भवन विभाग को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं सामाजिक एवं बुद्धिजीवी वर्ग का कहना है कि किसी भी परियोजना के उद्घाटन से पहले सभी औपचारिकताओं और आवश्यक सुविधाओं का पूरा होना आवश्यक होता है। उनका मानना है कि अस्पताल के उद्घाटन और उसके बाद वर्षों तक सेवाएं शुरू न होने से कई सवाल खड़े हुए हैं, जिन पर संबंधित विभागों को स्पष्टता प्रदान करनी चाहिए।
अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संघ के निदेशक राजेश सिंह पठानिया ने कहा कि यदि अस्पताल भवन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है तो सरकार को बिना विलंब आवश्यक चिकित्सकीय एवं पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि क्षेत्र की महिलाओं और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि अस्पताल शुरू न होने के कारण लोगों को उपचार के लिए निजी अस्पतालों और क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ रहा है।
क्षेत्र की कुछ सामाजिक संस्थाओं ने यह भी चिंता व्यक्त की है कि नूरपुर अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता लंबे समय से एक चुनौती बनी हुई है। उनका कहना है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इस मुद्दे को स्थानीय विधायक रणवीर सिंह निक्का भी विधानसभा में उठा चुके हैं। इसके बावजूद क्षेत्र के लोगों को अभी तक अस्पताल के पूर्ण रूप से शुरू होने का इंतजार है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मदर-चाइल्ड अस्पताल के शुरू होने से नूरपुर और आसपास के क्षेत्रों की हजारों महिलाओं एवं बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। ऐसे में जनता अब अस्पताल के शीघ्र संचालन और आवश्यक स्टाफ की तैनाती की मांग कर रही है।

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