नय जिलों के गठन से प्रशानिक अधिकारियों की संख्या के साथ अन्य संसाधनों की भरपाई से बढ़ेगा वित्तीय बोझ
नय जिलों के गठन से प्रशानिक अधिकारियों की संख्या के साथ अन्य संसाधनों की भरपाई से बढ़ेगा वित्तीय बोझ।
ज्वाली विधानसभा क्षेत्र के पूर्व पंचायत समिति सदस्य पंचायत डोल पधर साधू राम राणा ने जिलों के पुर्नगठन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश की वर्तमान दयनीय वित्तीय स्थिति को देखते हुए नय जिलों का पुर्नगठन किए जाने से प्रदेश की वित्तीय स्थिति और चरमरा सकती है। राणा ने कहा कि सरकार का हर सरकारी विभाग स्टाफ़ की कमी से पहले ही जूझ रहा है और जिस कारण वर्तमान कार्यरत कर्मचारियों को कामकाज का भारी भरकम बोझ उठाने के अलावा लोगों के काम भी समय पर नहीं हो पाते हैं। राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री जी एक तरफ प्रशानिक अधिकारियों की संख्या में कमी लाने की बात कर रहे और दुसरी तरफ नय जिलों का पुर्नगठन करने की बात करके प्रशानिक अधिकारियों की संख्या को बढ़ावा भी दिया जा रहा है। राणा ने कहा कि सरकार यदि दयनीय वित्तीय स्थिति के चलते चुनावी वर्ष में राजनीति लाभ लेने की सोच रखते हुए नय जिलों का पुर्नगठन करने का मन बना ही चुकी है तो भोगोलिक परिस्थितियों के आधार पर इंदौरा, नूरपुर, फतेहपुर ज्बाली को समायोजित करते हुए ज्बाली को जिला घोषित करने पर राजनीति से उपर उठकर बिचार किया जाए ताकि जिला संबधी कार्यों को करवाने केलिए दूर दराज़ धर्मशाला में आने जाने वाले समय और धन के खर्च से भी निजात जनता को मिल सके
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ज्वाली से राजेश कतनौरिया

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