नूरपुर अस्पताल में रोजाना 3–4 फ्रैक्चर के मरीज पहुंच रहे, हड्डी रोग विशेषज्ञ ने दी चेतावनी
नूरपुर अस्पताल में रोजाना 3–4 फ्रैक्चर के मरीज पहुंच रहे, हड्डी रोग विशेषज्ञ ने दी चेतावनी
नूरपुर : विनय महाजन /
नूरपुरआजकल बारिश के मौसम में फिसलन के कारण गिरने से कलाई की हड्डी टूटने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। सिविल अस्पताल नूरपुर में प्रतिदिन कलाई के फ्रैक्चर के तीन से चार मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. कार्तिक सैनी ने लोगों से अपील की है कि फ्रैक्चर होने पर देसी पट्टी, मालिश या पारंपरिक उपचार के चक्कर में न पड़ें, बल्कि तुरंत अस्पताल पहुंचकर एक्स-रे करवाएं और विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कराएं।डॉ. सैनी ने बताया कि बारिश में फिसलने के दौरान अधिकांश लोग खुद को बचाने के लिए हाथ आगे कर देते हैं। ऐसे में पूरे शरीर का भार कलाई पर पड़ता है, जिससे रेडियस सहित अन्य हड्डियों में फ्रैक्चर होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। कई बार हेयरलाइन या जोड़ के भीतर का फ्रैक्चर सामान्य रूप से दिखाई नहीं देता, इसलिए एक्स-रे जांच बेहद जरूरी होती है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "मालिश से हड्डी नहीं जुड़ती, बल्कि नुकसान और बढ़ सकता है।" फ्रैक्चर होने पर डॉक्टर टूटी हुई हड्डी को सही स्थिति में लाकर प्लास्टर या आवश्यकता पड़ने पर रॉड के माध्यम से स्थिर करते हैं। यदि इस दौरान देसी मालिश या जोर-जबरदस्ती की जाती है तो हड्डी के टूटे हुए हिस्से अपनी जगह से खिसक सकते हैं, जिससे हड्डी टेढ़ी जुड़ने का खतरा बढ़ जाता है।डॉ. सैनी ने बताया कि फ्रैक्चर के बाद अंदरूनी सूजन और रक्तस्राव पहले से ही मौजूद होता है। ऐसे में मालिश करने से सूजन और रक्तस्राव बढ़ सकता है, जिससे दर्द भी अधिक हो जाता है। कई मामलों में देसी पट्टी को अत्यधिक कसकर बांधने से रक्त संचार प्रभावित हो सकता है, जो गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हड्डी गलत तरीके से जुड़ जाती है तो भविष्य में लगातार दर्द, कलाई में जकड़न, हाथ की कार्यक्षमता में कमी तथा गठिया (आर्थराइटिस) जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए फ्रैक्चर होने पर घायल हाथ को स्थिर रखें, कपड़े में लपेटकर लगभग 15 मिनट तक बर्फ की सिकाई करें, हाथ को हृदय के स्तर से ऊपर रखें और बिना देर किए अस्पताल पहुंचकर एक्स-रे करवाएं।डॉ. सैनी ने यह भी कहा कि यदि कलाई में अत्यधिक सूजन हो, हाथ टेढ़ा दिखाई दे, उंगलियां सुन्न या नीली पड़ जाएं अथवा हड्डी बाहर दिखाई दे तो इसे आपात स्थिति मानते हुए तुरंत हड्डी रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। उन्होंने बारिश के मौसम में एंटी-स्किड जूते पहनने, सीढ़ियों पर रेलिंग का सहारा लेने तथा फिसलन वाले स्थानों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह भी दी।

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