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विकास खण्ड नगरोटा सूरियां को पुनः नगरोटा सूरियां स्थापित करने के आदेश

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विकास खण्ड नगरोटा सूरियां को पुनः नगरोटा सूरियां स्थापित करने के आदेशों की वुधवार को खबर मिलते ही ग्रामीणों में खुशी की लहर ग्रामीण विकास विभाग ने विकास खण्ड को पुनः ज्वाली से नगरोटा सूरियां में स्थापित करने के दिए निर्देश  (नगरोटा सूरियां : प्रेम स्वरूप शर्मा ) विकास खण्ड नगरोटा सूरियां को ज्वाली से पुनः नगरोटा सूरियां स्थापित करने के आदेशों की वुधवार को खबर मिलते ही ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई है। ग्रामीण विकास विभाग ने विकास खण्ड अधिकारी को पत्र लिख कर विकास खण्ड को पुनः ज्वाली से स्थानांतरित कर नगरोटा सूरियां में स्थापित करने के निर्देश जारी किए हैं। विकास खण्ड अधिकारी ने  प्रदेश उच्च न्यायालय की रोक के बाबजूद 08 जुलाई को विकास खण्ड को नगरोटा सूरियां से ज्वाली शिफ्ट कर दिया और इसका प्रदेश ग्रामीण विकास विभाग ने कड़ा संज्ञान लिया है और ग्रामीण विकास विभाग ने न्यायाल के रोक आदेशों की पालना करते हुए विकास खण्ड को पुनः नगरोटा सूरियां स्थापित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।   विकास खण्ड मुख्यालय के सभी दस्तावेजों को  नगरोटा सूरियां से बीडीओ ने 08 जुलाई क...

सी.आर.पी.एफ के जवान का सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

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सी.आर.पी.एफ के जवान का सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार  सी.आर.पी.एफ की 40 बटालियन के ए.एस.आई सुधीर कुमार डढवाल जो जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्र अनंतनाग में तैनात थे जिनका 11 जुलाई को ड्यूटी के दौरान आए हृदयाघात से देहांत हो गया था आज गांव तलवाड़ा गुजरां में पूरे सैन्य सम्मान से उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। अनंतनाग से ही शहीद की 40 बटालियन के सहायक कमांडेंट वरिंदर कुमार के नेतृत्व में पहुंची सैन्य टुकड़ी ने शस्त्र उल्टे कर हवा में गोलियां दागते हुए बिगुल की गौरवशाली धुन के साथ शहीद ए.एस.आई सुधीर कुमार डढवाल को सलामी दी। इस अवसर पर सहायक कमांडेंट वरिंदर कुमार, इंस्पेक्टर संदीप कुमार, शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंद्र सिंह विक्की, शहीद के पिता रिटायर्ड हवलदार कर्म चंद, बेटे अंकुश डढवाल, ए.एस.आई कुलदीप कुमार ने शहीद की पार्थिव देह पर रीथ चढ़ा सैल्यूट करते हुए अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इससे पहले तिरंगे में लिपटी हुई ए.एस.आई सुधीर कुमार की पार्थिव देह जब गांव तलवाड़ा गुजरां पहुंची तो पिछले दो दिनों से शोक में डूबे हर गांव वा...

नादौन के साहिल ने वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बन कर किया नाम रोशन

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नादौन के साहिल ने वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बन कर किया नाम रोशन  हमीरपुर : शनिवार को हैदराबाद स्थित एअरफोर्स अकादमी में आयोजित पासिंग आऊट परेड में साहिल के माता-पिता संजय कुमार और नीलम इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बन कर गोरवान्वित हुए। आपको बता दें कि साहिल शर्मा हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर नादौन के गांव बदेहरा से हैं। साहिल के दादा, नाना और पिता ने भी देश की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साहिल के पिता संजय कुमार भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हवलदार हैं और वर्तमान में हिमाचल प्रदेश परिवहन निगम में कंडक्टर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता नीलम एक गृहिणी हैं। साहिल ने पहली वार में ही एनडीए की परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली थी। अपनी इस सफलता का श्रेय साहिल ने अपने माता-पिता और उन सभी शिक्षकों को दिया है जिन्होंने उनके इस सफर में उनका मार्गदर्शन किया। साहिल ने आठवीं तक की शिक्षा डीएवी कांगू से पूरी की। इसके बाद उन्होंने सैनिक स्कूल सुजानपुर से 12वीं तक की पढ़ाई की। 

एडीबी ने भारत के लिए खोला खजाना, भारत को मिलेगा हर साल इतना पैसा

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एडीबी ने भारत के लिए खोला खजाना, भारत को मिलेगा हर साल इतना पैसा  हिमाचल मीडिया ब्यूरो  : हाल ही में भारत की इकोनॉमी के आंकड़े सामने आए हैं. इसके तहत भारत की ग्रोथ रेट 6.5 फीसदी है, जोकि दुनिया के तमाम बड़े देशों के मुकाबले में सबसे तेज है. खास बात तो ये है कि मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की ग्रोथ 6.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है और इस वित्त वर्ष में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन सकता है. जिसके अगले 3 साल में तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने का अनुमान लगाया गया है. ऐसे में भारत की ओर एडीबी का हाथ बढ़ाना काफी दिलचस्प है. एडीबी की ओर से हर साल जितना कर्ज देने की बात कही गई है, उससे भारत की इकोनॉमी को काफी बड़ा बूस्ट मिल सकता है. एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के अध्यक्ष मासातो कांडा ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत को हर साल 4.5 अरब डॉलर तक का लोन देने के लिए तैयार है. कांडा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट किया, कल मैंने भारत के साथ एडीबी की साझेदारी को मजबूत करने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए नई दिल्ली में वित्त मंत्र...

केट विंसलेट के अभिनय की बारीकियों को उजागर करने वाली 3 फिल्में

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केट विंसलेट के अभिनय की बारीकियों को उजागर करने वाली 3 फिल्में  ( कल्पना पांडे )   केट विंसलेट की सिनेमाई यात्रा कलात्मक विविधता और व्यावसायिक जोखिम लेने की इच्छा का एक सुंदर उदाहरण है। 1994 की फिल्म हेवनली क्रिएचर्स से अपने करियर की शुरुआत करते हुए, उन्होंने निडर होकर चुनौतीपूर्ण फिल्मों का चयन किया। इन फिल्मों में, विंसलेट केवल अभिनय नहीं कर रही थीं, बल्कि वास्तव में पात्रों को जी रही थीं। जेम्स कैमरून की टाइटैनिक (1997) में रोज़ डेविट बुकाटर के रूप में अपनी रोमांटिक और दुखद भूमिका के बाद, केट विंसलेट रातोंरात वैश्विक प्रसिद्धि प्राप्त कर गईं। इस फिल्म ने भारत सहित कई देशों में अपार लोकप्रियता हासिल की, जहाँ पहले अंग्रेजी फिल्मों का इतना महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा था। भारतीय दर्शकों के लिए, वह पहली अंग्रेजी अभिनेत्री बन गईं जिन्हें वे दिल से प्यार करते थे। हालांकि, उन्होंने इस नई प्रसिद्धि का उपयोग केवल ब्लॉकबस्टर बैनर फिल्मों को आगे बढ़ाने के लिए नहीं किया; इसके बजाय, उन्होंने छोटी, अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को चुना जो उन्हें नए और जटिल पात्रों को चित्रित कर...

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