सी.आर.पी.एफ के जवान का सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

सी.आर.पी.एफ के जवान का सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार 


सी.आर.पी.एफ की 40 बटालियन के ए.एस.आई सुधीर कुमार डढवाल जो जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्र अनंतनाग में तैनात थे जिनका 11 जुलाई को ड्यूटी के दौरान आए हृदयाघात से देहांत हो गया था आज गांव तलवाड़ा गुजरां में पूरे सैन्य सम्मान से उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। अनंतनाग से ही शहीद की 40 बटालियन के सहायक कमांडेंट वरिंदर कुमार के नेतृत्व में पहुंची सैन्य टुकड़ी ने शस्त्र उल्टे कर हवा में गोलियां दागते हुए बिगुल की गौरवशाली धुन के साथ शहीद ए.एस.आई सुधीर कुमार डढवाल को सलामी दी। इस अवसर पर सहायक कमांडेंट वरिंदर कुमार, इंस्पेक्टर संदीप कुमार, शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंद्र सिंह विक्की, शहीद के पिता रिटायर्ड हवलदार कर्म चंद, बेटे अंकुश डढवाल, ए.एस.आई कुलदीप कुमार ने शहीद की पार्थिव देह पर रीथ चढ़ा सैल्यूट करते हुए अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इससे पहले तिरंगे में लिपटी हुई ए.एस.आई सुधीर कुमार की पार्थिव देह जब गांव तलवाड़ा गुजरां पहुंची तो पिछले दो दिनों से शोक में डूबे हर गांव वासी की आँखें नम हो उठीं क्योंकि सुधीर कुमार बहुत ही मिलनसार स्वभाव के धनी और सारे क्षेत्र के लाडले थे जिनके बलिदान की खबर सुनते ही पिछले दो दिनों से किसी के घर चूल्हा नहीं जला। तिरंगे में लिपटी बेटे की पार्थिव देह को देख मां उषा देवी, पिता रिटायर्ड हवलदार कर्म चंद डढवाल, पत्नी जीवन, भाई अजय कुमार, बहनें सीमा व शोभा की करुणामई सिसकियां पत्थरों का कलेजा छलनी कर रहीं थी वहीं शहीद का बेटा अंकुश व बेटी मुस्कान सजल नेत्रों से अपने बलिदानी पिता के ताबूत को एकटक निहार रहे थे, पिता का साया सिर से उठने का दर्द उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था। बेटे अंकुश ने जब शहीद पिता की चिता को मुखाग्नि भेंट की तो सारा श्मशान घाट भारत माता की जय के जयघोष से गूंज उठा।

शहीद ए.एस.आई सुधीर कुमार की पत्नी जीवन ने नम आंखों से बताया कि मेरे ससुर कर्म चंद बीमार थे और उनका इलाज करवाने हेतु उनके पति 15 दिन की छुट्टी काट चार दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे और 11 जुलाई को ही सुबह साढ़े सात बजे उनकी पति से फोन पर बात हुई थी मगर उनके क्या पता था कि यह उनका आखिरी फोन होगा, पति के चले जाने से उनकी तो दुनिया ही उजड़ गई है अब वो किसके सहारे जिदंगी काटेगी वहीं मां उषा देवी ने बिलखते हुए कहा कि सुधीर उनके बुढ़ापे का सहारा था उसी के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी थी उसके चले जाने से उनके बुढ़ापे की लाठी टूट गई है और शायद ही वो इस सदमें से कभी उभर पाएंगी।

इस अवसर पर परिषद के महासचिव कुंवर रविंद्र सिंह विक्की ने ए.एस.आई सुधीर कुमार डढवाल के परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि उनकी परिषद इस दुख की घड़ी में उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी है हम इनके हौंसले को परास्त नहीं होने देंगे। सुधीर के चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है इस सदमे से उभरने के लिए परिवार को समय लगेगा। कुंवर विक्की ने कहा देश का वीर सैनिक एक तरफ पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद से लड़ रहा है वहीं कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी देते हुए हर गर्मी सर्दी को अपने सीने पर झेलते हुए देशवासियों को चैन की नींद प्रदान कर रहा है ऐसे वीर सपूतों का देश सदैव कर्जदार रहेगा। 

सहायक कमांडेंट वरिंदर कुमार ने कहा कि ए.एस.आई सुधीर कुमार बहुत ही बहादुर सैनिक थे तथा आतंक के खिलाफ शुरू किए हर ऑपरेशन में वालंटियर होकर जाते थे उनके जाने से सी.आर.पी.एफ ने अपना एक अमूल्य हीरा व बहादुर योद्धा खो दिया है हम इनके परिवार को भरोसा दिलाते हैं कि वह खुद को अकेला न समझें यूनिट का हर जवान इनके बेटे समान है तथा इनका यह दुख हम साथ मिलकर बांटेगे। इस अवसर पर उन्होंने बटालियन की तरफ से शहीद के अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजनों को 75 हजार रुपए की नगद राशि भेंट की।

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